घटे विद्यार्थी, बंदी के कगार पर कई अभियांत्रिकी महाविद्यालय

घटे विद्यार्थी, बंदी के कगार पर कई अभियांत्रिकी महाविद्यालय

Shankar Sharma | Publish: Jun, 14 2018 09:27:24 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

इंजीनियरिंग के प्रति विद्यार्थियों के घटते रुझान से इंजीनियरिंग कॉलेजों की परेशानी बढ़ गई है। कम्प्यूटर साइंस और इंलेक्ट्रोनिक्स तक की मांग घटी है।

बेंगलूरु. इंजीनियरिंग के प्रति विद्यार्थियों के घटते रुझान से इंजीनियरिंग कॉलेजों की परेशानी बढ़ गई है। कम्प्यूटर साइंस और इंलेक्ट्रोनिक्स तक की मांग घटी है। कॉलेजों को स्नातक और स्नातकोत्तर की सभी १८० सीटें भरना असंभव हो गया है। कई इंजीनियरिंग कॉलेजों ने उन कोर्स को बंद कर दिया है जिसके प्रति विद्यार्थी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। कई कॉलेजों पर तो बंद होने का खतरा मंडरा रहा है।


खुद कई इंजीनियरिंग कॉलेजों ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से संपर्क कर कई कोर्सों को बंद करने की अनुमति मांगी थी। एआईसीटीई ने ३५ कॉलेजों को ७५ से भी ज्यादा कोर्सों को बंद करने की अनुमति दी है। इन कॉलेजों में शहर के कई टॉप कॉलेज भी शामिल हैं।


गत वर्ष २९ हजार सीटों पर दाखिला नहीं
इंजीनियरिंग, मेडिकल व डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रदेश के विभिन्न निजी कॉलेजों में दाखिले के लिए प्रदेश के मेडिकल, इंजीनियरिंग व डेंटल कॉलेजों के संघ (कोमेड-के) के व सामान्य प्रवेश परीक्षा के संचालन करने वाले कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण के गत वर्ष के आंकड़ों पर नजर डाले तो ७७५०० इंजीनियरिंग सीटों में से करीब २९००० सीटों पर दाखिला नहीं हुआ था। वर्ष २०१६ में भी २२ हजार से ज्यादा सीटों पर दाखिला नहीं हुआ।


पाठ्यक्रम जारी रखना पड़ रहा महंगा
कॉलेज प्रवक्ताओं के अनुसार विद्यार्थियों के बिना कई कोर्स चलाना महंगा साबित हो रहा है। प्रभावित कोर्सों में डिजिटल इलेक्ट्रोनिक्स, संचार इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, केमिकल इंजीनियरिंग से लेकर इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रोनिक्स जैसे कोर्स शामिल हैं।


कॉलेज और सीटें ज्यादा
यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरय्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के पूर्व प्राचार्य डॉ. के. आर. वेणुगोपाल कई निजी कॉलेजों में कम्प्यूटर इंजीनियरिंग व इलेक्ट्रोनिक्स जैसे टॉप कोर्स की मांग भी घटी है।
इसके दो कारण हैं: पहला इंजीनियरिंग के प्रति विद्यार्थी अब आकर्षित नहीं हैं।
दूसरा कर्नाटक सहित पड़ोसी राज्यों में भी इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या बढऩे के कारण अन्य राज्य से कम विद्यार्थी आ रहे हैं। एआईसीटीई के अनुसार गत वर्ष तक देश भर के १०३६१ इंजीनियरिंग कॉलेजों में ३७ लाख सीटें थीं। २७ लाख से ज्यादा सीटों पर दाखिला नहीं हुआ था। सभी कॉलेजों को एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त है।


कौशल की कमी भी समस्या
एम. एस. रामय्या इंजीनियरिंग कॉलेज के एक प्रोफेसर ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि डिग्री के बाद हर वर्ष हजारों इंजीनियरों को नौकरी नहीं मिलती या यूं कहें कि कौशल की कमी के कारण वे अपनी योग्यता साबित नहीं कर पाते हैं।
यह क्रम जारी रहेगा। इस कारण आकर्षण घट रहा है। आने वाले समय में कॉलेजों की हालत और खराब होगी।

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