..फिर स्कूल जाएगी नन्हीं सुरभि

  • 10 लाख बच्चों में ऐसा एक मामला सामने आता है। ट्यूमर करीब 3.5 किलो का था।

By: Nikhil Kumar

Published: 17 Feb 2021, 10:10 AM IST

- गुजरात की 15 वर्षीय बच्ची को मिली नई जिंदगी
- 21 चिकित्सकों ने गले और छाती से निकाला फुटबॉल के आकार का ट्यूमर
- क्रॉउड फंडिंग (crowdfunding) से 6200 दाताओं ने जुटाए 70 लाख रुपए

बेंगलूरु.

बचपन में ही गले में ट्यूमर की शुरुआत से इसके छाती तक फैल कर फुटबॉल (football like Tumour weighing 3.5 kg) के आकार का होने का दुर्लभ मामला सामने आया है। करीब 10 वर्ष बाद सुरभि को नई जिदंगी मिली है। एक निजी अस्पताल के 21 चिकित्सकों ने इस ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाला है। एक वर्ष के दौरान बच्ची की छोटी-बड़ी पांच सर्जरी हुई।

खेतिहर मजदूर हैं पिता

गुजरात (Gujrat) के अमरेली जिले की सुरभि के पिता खेतिहर मजदूर हैं। उपचार का खर्च उठाने में असमर्थ थे। सोशल मीडिया (social media) पर सुरभि (Surabhi) की कहानी वायरल होने के बाद लोग मदद के लिए हाथ बढ़ाने लगे। 6,200 दाताओं ने उपचार के लिए करीब 70 लाख रुपए जुटाकर बच्ची और परिवार की मदद की। चिकित्सकों ने इसे दुर्लभ मामला बताया है। 10 लाख बच्चों में ऐसा एक मामला सामने आता है। ट्यूमर करीब 3.5 किलो का था।

जोखिम भरा था ट्यूमर को छेडऩा

एस्टर सीएमआइ अस्पताल (Aster CMI HOSPITAL) में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. चेतन जी. ने बताया कि छह-सात वर्ष की आयु से ही सुरभि के गले में ट्यूमर ने आकार लेना शुरू कर दिया था। अगले आठ से नौ वर्षों में ट्यूमर (Tumour) बढ़कर इतना बड़ा और जानलेवा हो गया। इससे पहले कई अस्पतालों में उपचार हुआ। लेकिन, ट्यूमर को छेडऩा जोखिम भरा था। शायद इसीलिए सुरभि कई वर्षों तक असल उपचार से दूर रही। सर्जरी अंतिम विकल्प था। सुरभि पहली बार दिसंबर 2019 में अस्पताल लाई गई थी। ट्यूमर के कारण वह ठीक से सांस तक नहीं ले पा रही थी। गत वर्ष जनवरी में सर्जरी हुई।

तीन ट्यूमर जटिल तरीके से आपस में जुड़े थे

डॉ. चेतन ने बताया कि गर्दन में तीन ट्यूमर जटिल तरीके से आपस में जुड़े थे। सर्जरी जटिल और सफलता दर बेहद कम थी। ट्यूमर को निकालने से पहले संभव हद तक इसके छोटा किया गया। ट्यूमर ने छाती को पूरी तरह से ढक रखा था। सर्जरी के लिए चीरा लगाना चुनौतीपूर्ण था। शरीर के अन्य अंगों को भी बचाए रखना था। सात घंटे तक सर्जरी चली। ट्यूमर निकला लेकिन इतने बड़े घाव को ढकने के लिए आसपास त्वचा नहीं बची थी। त्वचा ग्राफ्टिंग (skin grafting) काम नहीं आती। जांघ सहित शरीर के अन्य हिस्सों से त्वचा ले कर फ्लैप सर्जरी (flap surgery) की गई। गले की रक्त वाहिकाओं को वेन ग्राफटिंग (Vein Grafting) तकनीक से दुरुस्त करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। माइक्रो सर्जिकल तकनीक उपचार में काम आई।

एनेस्थिसिया प्रक्रिया जटिल रही

एनेस्थेटिस्ट डॉ. अरुण वी ने बताया कि एनेस्थिसिया प्रक्रिया जटिल रही। उपचार के दौरान करीब एक वर्षों तक वह टे्रकियोस्टोमी ट्यूब के जरिए जांस ले रहे थी। सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. गिरीश जी. ने बताया कि ट्यूमर कैंसर युक्त नहीं था। लेकिन इस तरह के ट्यूमर दोबारा बन जाते हैं। सूरत (Surat) के एक अस्पताल में चिकित्सकों की टीम सुरभि की देखरेख कर रही है। उसके स्वास्थ्य पर नियमित निगरानी रखने की जरूरत है। स्वस्थ होने से खुश सुरभि फिर से स्कूल जाने को आतुर है। सुरभि को ट्यूमर के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा और उसने स्कूल जाना भी छोड़ (Left school) दिया था।

Show More
Nikhil Kumar Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned