तपस्या, साधना और सफलता का मूल

धर्मसभा में बोले सुधाकर मुनि

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 26 Aug 2020, 09:01 AM IST

बेंगलूरु. तेरापंथ युवक परिषद हनुमंतनगर की ओर से मुनि सुधाकर के सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में तेयुप अध्यक्ष पवन बोथरा ने सभी का स्वागत किया। सुर संगम भजन मंडली ने तपस्वियों की अनुमोदना के लिए गीत गाए गए। मुनि सुधाकर ने कहा कि तपस्या, साधना और सफलता का मूल है।

तपस्या के बिना कोई भी साधना सफल नहीं हो सकती। सुख और स्वस्थ जीवन के लिए छोटे बड़े निराहार तप के प्रयोग भी जरूरी हंै। पेट और मस्तिष्क साथ उपासना नहीं हो सकती, जो मस्तिष्क की शक्तियों और क्षमताओं का विकास करना चाहता है उन्हें पेट का संयम करना होगा। विश्व में जितने भी विचारक और प्रतिभा संपन्न महापुरुष हुए हैं उन्होंने खाने की आसक्ति का परित्याग किया है।

जो बड़ी तपस्या नहीं कर सकते, उन्हें उनोदरी तप जरूर करना चाहिए। भोजन के समय अपने पेट को हल्का रखना। थोड़ा कम खाना यह उनोदरी तप का अर्थ है। तपस्या के बारह भेदों में भी इसका उल्लेख है।

जीवन में तप का विस्तार होना चाहिए पर उसके साथ कषायों और विकारों का ताप नहीं बढऩा चाहिए। कषाय के ताप से हमारी विवेक चेतना लुप्त हो जाती है। तपस्या आत्म शुद्धि और मानसिक शांति का प्रमुख साधन है पर कषाय के ताप से तपस्या मलिन और धूमिल हो जाती है। काम, क्रोध, मद, मोह आदि सभी कषाय है। क्रोध में व्यक्ति यदि उपवास भी करे तो वह सच्चा उपवास नहीं होता।

धर्म की साधना में शांति और समता का आधार चाहिए। तपस्या के समय ध्यान, स्वाध्याय और विशिष्ट मंत्रो का जाप करना चाहिए। सभा से मंत्री हरकचंद ओस्तवाल, महिला मंडल अध्यक्ष मंजू दक, तेयुप निवर्तमान अध्यक्ष गौतम खाब्या एवं कमलेश झाबक ने अपने विचार व्यक्त किए। सभा अध्यक्ष सुभाष बोहरा, तेयुप परामर्शक प्रकाश बोल्या आदि उपस्थित थे। संचालन तेयुप मंत्री धर्मेश कोठारी ने किया।

Santosh kumar Pandey Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned