शिक्षा के लिए प्रेरणा शक्ति हैं शिक्षक

शिक्षा के लिए प्रेरणा शक्ति हैं शिक्षक

Shankar Sharma | Publish: Sep, 06 2018 10:54:48 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

शिक्षक गुरुदेव बेल्लुंडगी ने कहा है कि हर प्रकार की शिक्षा हासिल करने के लिए शिक्षक ही प्रेरणा शक्ति होते हैं।

धारवाड़. शिक्षक गुरुदेव बेल्लुंडगी ने कहा है कि हर प्रकार की शिक्षा हासिल करने के लिए शिक्षक ही प्रेरणा शक्ति होते हैं।
वे, धारवाड़ में जेएसएस आईटीआई कालेज में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।


उन्होंने कहा कि विश्व की नागरिकता के विकास में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मनुष्य चाहे कोई भी व्यवसाय का चयन कर लें उसके पीछे शिक्षक की कड़ी मेहनत होती है। श्रेष्ट व्यक्तियों की जीवनी पर नजर डाली जाए तो उनके माता-पिता के बाद गुरु का ही प्रमुख स्थान रहा है।


उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में शिक्षक को अपने पद की गरिमा बनाए रखने की जरूरत है। विद्यार्थियों को सिर्फ उच्च शिक्षा हासिल करना पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें शिक्षकों से नरमी और सम्मान से पेश आना चाहिए। शिक्षितों से ही अधिक गलतियां होती हैं, ऐसा मानना बेहद शर्मनाक है। गुरु-शिष्य परम्परा से मात्र ऐसी गलतियों को रोका जा सकता है।
समारोह की अध्यक्षता कर जेएसएस आईटीआई कालेज के प्राचार्य महावीर उपाध्य ने कहा कि मनुष्य में मानवता जगाने के लिए एक शिक्षक का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है। शिक्षक का मतलब सिर्फ अक्षर ज्ञान देना नहीं है। शिक्षक आज की पीढ़ी का मार्गदर्शक, भाई-बंधू बनकर विद्यार्थियों के कल्याण के लिए कार्यरत होना चाहिए। विद्यार्थियों को गलत राह पर चलने से रोकने वाला ही वास्तव में शिक्षक है। शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के भावचित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया गया। इस अवसर पर महेश कुंदरपिमठ, महेश बडिगेर, शोभा कम्मार, विनायक गवली, विद्या हिरेमठ, अशोक जिगलूर, सिध्दलिंगय्या हिरेमठ, विशाल भजंत्री आदि उपस्थित थे।

ढोल-थाल के संगीत पर महिलाओं ने किया नृत्य
बेंगलूरु. माली समाज बेंगलूरु सिटी की ओर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में मंगलवार को ओकलीपुरम स्थित माहेश्वरी सभा भवन में स्नेह मिलन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर मारवाड़ की महिलाओं ने ढोल-थाली के साथ आकर्षक नृत्य के साथ ही लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति देते हुए युवा पीढ़ी को अपनी हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति व परंपरा से रूबरू कराया। प्रारंभ में समाज के गणमान्यजनों कमलेश कुमार गहलोत, मिश्राराम सुंदेशा, भूराराम भोपोणी, जामताराम, नारायण वागानी, शंकरलाल सोलंकी, डूंगरचंद परमार, भबूताराम गहलोत, हीरालाल परमार, रमेश कुमार वागानी, कैसरराम, हरदान परिहार, बाबूलाल सुंदेशा ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा व आरती की।

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