जिसका गुरू नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं

कृष्णगिरी पाश्र्व-पद्मावती शक्तिपीठ धाम के प्रमुख संत यतिवर्य वसंत विजय ने कहा कि जिसके जीवन में गुरू नहीं होता उसका जीवन शुरू नहीं होता।

By: शंकर शर्मा

Published: 24 Jul 2018, 10:25 PM IST

बेंगलूरु. कृष्णगिरी पाश्र्व-पद्मावती शक्तिपीठ धाम के प्रमुख संत यतिवर्य वसंत विजय ने कहा कि जिसके जीवन में गुरू नहीं होता उसका जीवन शुरू नहीं होता। भगवान शनि ने भैरव को गुरु बनाया और ज्ञान प्राप्त कर अपनी ताकत के बल पर न्याय के देवता कहलाए। संत बसंत विजय कृष्ण गिरी पाश्र्व पद्मावति सेवा मंडल बेंगलोर की ओर से रविवार रात पैलेस ग्राउंड के प्रिंसेस श्राइन में भैरव महापुराण कार्यक्रम में सम्बोधित कर रहे थे।


सभागार में जयकारों के बीच मंच पर आसन ग्रहण करने के बाद संत वसंत विजय ने सस्वर संगीतमय भैरव महापुराण का शुभारंभ किया। उन्होंने सावन में बरसे बदरिया, भैरवजी की नगरिया...प्रस्तुत किया तो श्रद्धालु झूम उठे। आज रविवार है, भैरवजी का वार है, सच्चे मन से जो भी ध्यावे उसका बेड़ा पार है... आदि भजन प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि राज योग, महायोग, दिव्य योग, धन योग, वाहन योग, विदेश योग, कीर्ति योग, यश योग, वैभव योग, परिवार में सुख सम्पत्ति योग देने वाले भैरवनाथ की जो सेवा करता है वह कभी परेशान नहीं होता।


दुनिया में सात करोड़ प्रकार के भय भैरव का नाम लेने से दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भैरव के सात्विक, राजसिक और तामसिक तीन अलग-अलग रूप हैं। सात्विक रूप से शांति और राजसिक रूप से वैभव मिलता है और तामसिक रूप से शत्रु भय का नाश होता है।


दोष निवारण संकल्प कराया
संत वसंत विजय ने लोगों से कार्य सिद्धि, जीवन यश कीर्तिमय हो, राज योग, सुख योग, धन योग व विभिन्न दोषों के निवारण का संकल्प भी करवाया। उन्होंने सूर्य और उनकी पत्नी उषा की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि सूर्य का विवाह उषादेवी से हुआ था।


सूर्य अत्यधिक गर्म थे, उनके साथ रहना मुश्किल था। इस पर पतिव्रता उषा ने अपने तप से छाया रूपी उषा तैयार की जो सूर्य के पास रही और वह शिव पूजा में कैलाश पर्वत पर चली गई। सूर्य और छाया के एक पुत्र हुआ, जिसका नाम शनि था। शनि के काले थे इसलिए देव मंडल के बच्चे उनके साथ नहीं खेलते थे और उन्हें चिढ़ाते थे। पुत्र से यह बात सुन जब माता छाया ने इसे देवी पद्मावती को बताया तो पद्मावती ने पूछा-कैसा ज्ञान चाहिए।

इस पर छाया ने वर मांगा कि उनका पुत्र पराक्रमी एवं ज्ञानवान हो और ब्रह्मांड के लोग इसे देख डरें। इस पर मां पद्मावती ने उसे भैरव की शरण में जाने को कहा। छाया ने भैरवनाथ के पास जाकर अपने पुत्र का गुरु बनकर दीक्षित करने का आग्रह किया। तब शनि ने भैरवदेव से शिक्षा दीक्षा ली और न्याय के देवता कहलाए। संत वसंत विजय ने आज के माता-पिता को इस कथा से प्रेरणा लेने को कहा।

शांतिप्रिय है जैन समुदाय
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महापौर आर. संपतराज ने कहा कि यहां मुझे गुरुजी का आशीर्वाद मिला है। यह मात्र मेरे लिए नहीं, अपितु बेंगलोर की जनता के लिए है। उन्होंने कहा कि जैन समुदाय सेवाभावी, परिश्रमी और शांतिप्रिय है। मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर जद-एस के राष्ट्रीय प्रवक्ता तनवीर अहमद व जनता दल के कार्यकारी सचिव राजेन्द्रसिंह कुम्पावत ने भी शिरकत की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि केसरीमल बुरड़, फूलचंद करबावाला, चम्पकलाल इसरानी, हस्तीमल सिसोदिया, देवेन्द्र डोसी, मनोहर लुंकड़, हेमराज पालगोता, कुमारपाल सिसोदिया, राजस्थान संघ कर्नाटक के अध्यक्ष रमेश मेहता, तेजराज मालानी, अशोक चौपड़ा, मोहनलाल मरलेचा थे।

इससे पूर्व कलाकारों हीना बहन, इन्दौर के देवेश जैन, वैभव वाग्मार ने भजन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम सफल बनाने में सज्जनराज बाफणा, महेन्द्र धारीवाल, दीपक शाह, चन्दुलाल जैन, नरेन्द्र कांस्टिया, प्रकाश लोढ़ा, संकेश छाजेड़, लोहित गांधी का योगदान रहा। ऑल इंडिया नाकोड़ा जैन कॉन्फ्रेंस, सरगम व भैरव चालीसा मंडल का भी सहयोग रहा। संचालन मनोहर भारती ने किया।

शंकर शर्मा
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