प्रवृत्ति और निवृत्ति का संतुलन जरूरी-मुनि सुधाकर

श्रद्धालुओं को संबोधित किया

By: Yogesh Sharma

Published: 30 Jan 2021, 01:02 PM IST

बेंगलूरु. मुनि सुधाकर व मुनि नरेशकुमार विहार करते हुए पेरियापटना पहुंचे। जहां पर बड़ी संख्या में जैन समाज ने मुनिवृंद का स्वागत किया। महावीर भवन में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनि सुधाकर ने कहा जीवन में प्रवृत्ति और निवृत्ति का संतुलन जरूरी है। खाने के साथ नहीं खाने का अभ्यास भी जरूरी है। खाद्य संयम के विविध प्रकार है। अपनी शक्ति के अनुसार उनका अनुसरण करना चाहिए। जैन धर्म की साधना में अनोदरी तपका बहुत महत्व बताया है। उसका तात्पर्य है भूख से कम खाना, अपने पेट को हल्का रखना, इसी प्रकार बोलने के साथ प्रतिदिन थोड़ा मौन व्रत भी करना चाहिए। आज हर मनुष्य का मस्तिष्क विचारों से बहुत भारी हो रहा है। इसे नाना प्रकार के रोग और तनाव बढ़ रहे हैं। ध्यान और स्वाध्याय से मस्तिष्क की मशीन को हमें विश्राम देना चाहिए। प्रेक्षा ध्यान के योगिक प्रयोगों से हम मानसिक रोग और तनाव से छुटकारा पा सकते हैं। जो लोग प्रवृत्ति के साथ निवृत्ति का अभ्यास नहीं करते हैं उनका जीवन नाना प्रकार की समस्याओं से ग्रसित हो जाता है ।
मुनि ने कहा धार्मिक साधना में क्रोध से बाधाएं उत्पन्न होती हैं। यह सभी जानते हैं इसके साथ ही पारिवारिक शांति और सुव्यवस्था में भी वह बाधक है। एक व्यक्ति के क्रोध से सारा घर नर्क बन जाता है। इसलिए मानसिक और परिवारिक शांति के लिए सब प्रकार के भावावेश पर विजय प्राप्त करना चाहिए। मुनि नरेश कुमार ने कहा धर्म को पगड़ी नहीं चमड़ी बनाएं। धर्म का उपदेश नहीं आचरण करें। धर्म हमें जीने की कला सिखाता है। इस अवसर पर अर्जुनलाल, बाबूलाल, सुरेश कुमार, पारसमल, गजुभाई, कन्हैयालाल, भीकमचंद, धीरचंद की उपस्तिथि रही।

Yogesh Sharma Reporting
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