नर से नारायण बनने का रसायन है धर्म-साध्वी सुधाकंवर

धर्मसभा का आयोजन

By: Yogesh Sharma

Published: 01 Aug 2021, 07:42 AM IST

बेंगलूरु. शहर में हनुमंतनगर जैन स्थानक में विराजित साध्वी सुधाकंवर ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म सच्चा कल्पवृक्ष है, धर्म सुख का मूल है, धर्म हमेशा जोडऩे का काम करता है तोडऩे का नहीं। धर्म वह है जो खंड-खंड मानवता को अखंडता प्रदान करता है, बिछड़े हुए दो हृदयों को मिलाता है धर्म दीवार नहीं द्वार है। स्थानांग सूत्र में प्रभु ने भी धर्म के चार द्वार बताए हैं-क्षमा, निर्लोभता, ऋजुता और मृदुता। धर्म नर से नारायण बनने का रसायन है। साध्वी ने कहा कि जो दुर्गति में गिरती हुई आत्मा को बचाता है वह धर्म है अथवा जो धारण करने योग्य है वह धर्म है। धर्म ढाई अक्षर का है लेकिन व्यक्ति को भवसमुद्र से तिरा देता है।
साध्वी सुयशा ने कहा कि रोशनी की एक किरण गहनतम अंधकार को दूर करने में सक्षम होती हैं, आग की एक चिंगारी रूई के ढेर को जलाकर भस्म करने में सक्षम होती हैं। उसी प्रकार हमारे जीवन की एक गलती हमारे जीवन को तहस-नहस कर सकती हैं। परंतु सम्यक दर्शन-सम्यक ज्ञान की एक किरण अनादि के कुसंस्कारों को नष्ट कर सुसंस्कारित जीवन की स्थापना कर सकती हैं परंतु शर्त यह है कि जीवन में विवेक की उपस्थिति होनी चाहिए। मनुष्य और पशु में अंतर करने वाली भेद रेखा है, विवेक। धर्मसभा का संचालन करते हुए अध्यक्ष कल्याण बुरड़ ने कहा कि 05 अगस्त को सुधाकंवर के जन्म दिवस के उपलक्ष में सजोड़े जाप का आयोजन किया जा रहा है। 06, 07, 08 अगस्त को आचार्य सम्राट आनंद ऋषि की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में सामूहिक तेले तप का आयोजन किया जा रहा है, सभी लोग इसमें अवश्य भाग लें।

Yogesh Sharma Reporting
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