कोरोना वायरस के कारण शहर हुआ साफ-सुथरा

Corona Lockdown in Karnataka: गत माह की तुलना में 1 हजार टन कम कचरा

By: Santosh kumar Pandey

Published: 23 Apr 2020, 04:04 PM IST

बेंगलूरु. लॉकडाउन के कारण गत 23 दिनों में बेंगलूरु शहर की सडक़ों पर फैलने वाले कचरे में भारी कमी आई है। उद्योग धंधे बंद होने से प्रमुख वृषभावती के पानी का रंग बदल गया है तथा इससे उठनेवाली बदबू भी काफी कम हो गई है। हाल में कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वृषभावती के पानी का परीक्षण करने के पश्चात इसके प्रदूषण में काफी गिरावट की रिपोर्ट तैयार की है।

बीबीएमपी अपशिष्ट प्रबंधन विभाग के आयुक्त डी रणदीप के मुताबिक लगभग 800 वर्ग किलोमीटर में फैले बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका के 198 वार्डों में प्रति माह 3800 से 4000 टन गीला तथा सूखा कचरे का संग्रहण किया जाता है। लेकिन अब लॉकडाउन के कारण शहर में प्रति दिन संग्रहित कचरे की मात्रा में काफी कमी आई है।

बड़े मार्केट बंद होने से कचरा घटा
लॉकडाउन के पश्चात शहर में 3000 टन से कम कचरा संग्रहित किया जा रहा है। केआरमार्केट, रसल मार्केट, यशवंतपुर तथा मडिवाला मार्केट बंद होने से सब्जिया नहं आ रहीं। इसलिए गीले कचरे की मात्रा घट गई है। शहर की पूरी आबादी घरों में होने से सडक़ों पर फैलने वाला कचरा भी कम हो गया है। वाणिज्य संकुल तथा शादी मंडप बंद होने से भी कचरा संग्रहण कम हो गया है।

कचरा वर्गीकरण की समस्या बरकरार
शहर में आज भी लोग घरों में गीले तथा सूखे कचरे का वर्गीकरण नहीं करने के कारण ऐसे कचरे के वर्गीकरण कि लिए शहर में सात केंद्र स्थापित किए गए है। गीले कचरे से इन केंद्रों में प्रतिदिन 500 से 700 टन जैविक खाद बनाई जा रही है। उसके पश्चात अतिरिक्त कचरा शहर के बाहरी क्षेत्रों में स्थित लैंडफिलिंग सेंटर में भेजा जा रहा है।

कचरे की मात्रा में एक हजार टन की गिरावट
दोड्डबल्लापुर तहसील के चिरगनहल्ली गांव के निकट स्थित लैंड फिलिंग सेंटर में प्रतिदिन 400 टन कचरा डंप किया जा रहा है। जनवरी तथा फरवरी माह की तुलना में मार्च माह का तीसरा तथा सप्ताह तथा अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में शहर में कचरे की मात्रा लगभग 1 हजार टन कम हुई है।

जनवरी माह में शहर में प्रतिदिन औसतन 3 हजार 600 टन, फरवरी में 3 हजार 790 टन, मार्च में 3990 टन कचरे का संग्रहण किया गया था। इस तुलना में अप्रैल माह के पहले दो सप्ताह में प्रति दिन औसतन 3000 टन कचरे का संग्रहण हो रहा है।

Santosh kumar Pandey Desk
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