गुर्दा रोग विशेषज्ञों की कमी से जूझता देश

गुर्दा रोग विशेषज्ञों की कमी से जूझता देश
bangalore news

Shankar Sharma | Publish: Oct, 03 2016 11:55:00 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

हर उम्र के लोगों में गुर्दे की बीमारियां चिंताजनक रूप से बढ़ी हैं, लेकिन देश में इसके इलाज के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है

बेंगलूरु. हर उम्र के लोगों में गुर्दे की बीमारियां चिंताजनक रूप से बढ़ी हैं, लेकिन देश में इसके इलाज के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। देश में हर साल करीब 2.2 लाख लोग गुर्दे की बीमारियों से ग्रस्त होते हैं। इनमें से 90 प्रतिशत मरीज चिकित्सकों तक पहुंचते ही नहीं पाते। स्वास्थ्य सुविधाओं सहित विशेषज्ञों की कमी और गरीबी इसके मूल कारण हैं।

इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजिस्ट के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में गुर्दा संबंधी बीमारियों के उपचार के लिए समुचित विशेषज्ञों की भारी कमी है। देश में करीब 1100 नेफ्रोलोजिस्ट हैं। ज्यादातर नेफ्रोलॉजिस्ट बड़े शहरों में सेवाएं दे रहे हैं। 1100 में से 160 नेफ्रोलोजिस्ट कर्नाटक में हैं। 160 में से 110 नेफ्रोलॉजिस्ट बेंगलूरु के विभिन्न अस्पतालों के लिए काम कर रहे हैं। गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. जॉर्ज अब्राहम के अनुसार देश के मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर सीटों की तादाद बहुत कम है। छात्रों की कमी न होने के बावजूद सीटों की संख्या कम क्यों है के सवाल पर डॉ. अब्राहम ने बताया कि आधारभूत ढांचे का अभाव और योग्य चिकित्सा शिक्षकों की कमी बड़ा कारण है। मणिपाल अस्पताल के वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. सुदर्शन बल्लाल ने बताया कि जीवन शैली में बदलाव के कारण गुर्दा मरीजों की संख्या बढ़ी है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप गुर्दे की सेहत के लिए घातक होते हैं।

सेंट जॉन अस्पताल में गुर्दा रोग विभाग के प्रमुख डॉ. गोकुलनाथ ने बताया कि कर्नाटक में एम.एस. रामय्या अस्पताल, मणिपाल अस्पताल और सेंट जॉन अस्पताल में नेफ्रोलॉजी में पीजी की पढ़ाई की सुविधा है। भारतीय चिकित्सा परिषद् से मेडिकल कॉलेज एवं सीटों की संख्या बढ़ाने पर बातचीत की जा रही है।


आंकड़ों की तस्वीर
125 करोड़ लोग, 1100 विशेषज्ञ
160 नेफ्रोलॉजिस्ट, कर्नाटक में
पीजी स्तर पर सीटों की तादाद कम
आधारभूत ढांचे का अभाव

&मधुमेह और उच्च रक्तचाप के कारण 60 फीसदी  मरीजों के गुर्दे खराब हो जाते हैं। इसका सीधा असर हृदय पर पड़ता है। हृदय अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गुर्दा देखभाल को लेकर इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजिस्ट देश के कई अस्पतालों और विशेषज्ञों के साथ काम कर रहा है। गुर्दा संबंधी बीमारियों की समय रहते पहचान कर जीवनशैली, खानपान में बदलाव और दवाओं से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित जांच भी जरूरी है।  
डॉ.देवी प्रसाद शेट्टी, हृदय रोग विशेषज्ञ
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