सत्य की साधना से खुलते हैं भाग्य के दरवाजे: डॉ. समकित मुनि

अशोकनगर शूले जैन स्थानक में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 20 Jul 2020, 04:49 PM IST

बेंगलूरु. अशोकनगर शूले जैन स्थानक में डॉ. समकित मुनि ने "समकित की यात्रा" के अंतर्गत बत्तीस योग संग्रह के अगले सूत्र सत्य का की व्याख्या करते कहा सत्य बोलने में विवेक रखो। सत्य जीवन का प्रकाश है, आत्मा की उज्जवलता है, सत्य निर्दोष है, पवित्र है। बड़े-बड़े ऋषि मुनियों ने सत्य की महिमा गाई है। सत्य की महिमा अपरंपार है। चंद्रमा से अधिक सौम्य सत्य है, सूर्य से अधिक देदीप्यमान सत्य है, सत्य सागर से अधिक गंभीर है।

राजा हरीशचंद्र ने सत्य को धारण किया तो वह अमर हो गए। मुनि ने राजा विक्रमादित्य के जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि वह सत्य के लिए जीते और मरते थे। जब हम नैतिकता का जीवन जीते हैं तब जीवन देदीप्यमान बनता है। सत्य की इतनी गरिमा है की गई हुई संपत्ति (लक्ष्मी)भी पुन: लौट आती है। सत्य की साधना भाग्य के दरवाजे खोलती है। बिना झूठ बोले हम पूरी जिंदगी जी सकते हैं परंतु सत्य के बिना एक दिन भी नहीं निकाल सकते हैं।

मुनि ने कहा कि सत्य से ही वाणी की शोभा है। जीवन को सत्यम शिवम सुंदरम बनाना है तो केवल सत्य को जाने नहीं बल्कि उसे पचाना भी सीखें। सत्य की साधना भाग्य के दरवाजे खोलती है। सत्य की साधना कठिन जरूर है परंतु सत्य को जीवन में उतारने वाले के जीवन में कोई कमी नहीं रहती।

सत्य की सुरक्षा के लिए कुछ परहेज बताते हुए मुनि ने कहा कि बोलने में विवेक रखें। कान बड़े रखो जुबान छोटी रखो सुनने की ताकत ज्यादा रखो बोलो कम। इससे रिश्ते सलामत रहते हैं।

संचालन संघ मंत्री मनोहरलाल बंब ने किया। प्रचार प्रसार चेयरमैन प्रेम कुमार कोठारी ने बताया कि सूर्य प्रताप जैन, महेंद्र चोपड़ा, वंदना कोठारी, चंचलबाई चोपड़ा आदि श्रावक श्राविका उपस्थित थे।

Santosh kumar Pandey Desk
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