परमात्मा की भक्ति मनुष्य को परमात्म तुल्य बनाती है

महावीर भवन में जैनाचार्य रत्नसेन सूरीश्वर ने धर्मसभा में कहा कि इस अवसर्पिणी काल में हुए चौबीस तीर्थंकरों के जीवन में पंच कल्याणक रुप विशेषताएं सभी में एक समान है।

By: शंकर शर्मा

Published: 30 Dec 2018, 11:10 PM IST

मैसूरु. महावीर भवन में जैनाचार्य रत्नसेन सूरीश्वर ने धर्मसभा में कहा कि इस अवसर्पिणी काल में हुए चौबीस तीर्थंकरों के जीवन में पंच कल्याणक रुप विशेषताएं सभी में एक समान है। उनके माता की गर्भ में आते माता १४ महास्वप्न देखती हंै।

जन्म होने के बाद उन्हें इंद्र महाराज पांच रुप करके असंख्य देवताओं के साथ एक लाख योजन ऊंचे मेरु पर्वत पर ले जाकर, एक करोड़ साठ लाख कलशों से जन्माभिषेक करते हैं। मन वचन और काया की एकाग्रता से की हुई परमात्मा की भक्ति हमें परमात्म तुल्य बनाती है। फिर भी अनादिकाल के कुसंस्कारों के कारण वचन और काया का समर्पण तो खूब आसान है, परंतु मन का समर्पण करना अत्यंत ही कठिन है।

जीवन निर्वाह के लिए नहीं, निर्वाण के लिए जीना चाहिए
बेंगलूरु. राजाजीनगर में साध्वी जयश्री ने प्रवचन में कहा कि संसार की अनंत आत्माएं इस संसार में जीवन निर्वाह के लिए जीवन जी रही है। जिनका लक्ष्य केवल जीवन की गाड़ी को धक्का देना है। कुछ ऐसी आत्माएं है जो जीवन का निर्माण करना चाहती है। जिनका लक्ष्य कि हम कुछ न कुछ बन जाएं। लेकिन, इस संसार में बहुत कम आत्माएं जो जीवन का निर्वाण करना चाहती है। संसार के प्रपंच से मुक्त होना चाहती है, क्योंकि उसके लिए प्रबल पुरुषार्थ की
आवश्यकता है।

आदर्श स्कूल क्रीड़ोत्सव में दिखी प्रतिभा
बेंगलूरु. आदर्श गु्रप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स द्वारा संचालित मनवरथपेट स्थित आदर्श स्कूल का वार्षिक क्रीड़ोत्सव शनिवार को मक्कलकूटा ग्राउंड में किया गया।


समारोह के अतिथियों में संस्थान के अध्यक्ष केके भंसाली, उपाध्यक्ष पदमराज मेहता, संयुक्त सचिव दीपंचद नाहर सहित हस्तीमल सिसोदिया, अरविंद डोसी उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रकाश पिरगल एवं सोहन सुराणा उपस्थित थे। सभी अतिथियों ने झंडोत्तोलर कर दीप प्रज्ज्वल किया। इस अवसर पर विïद्यार्थियों ने मार्च पास्ट किया। विविध प्रकार के खेलों में विïद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा प्रस्तुत की। इसके पूर्व स्वागत प्रिंसिपल अम्बिका एल ने किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेलकूद प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। धन्यवाद वाइस प्रिंसिपल त्रिवेणी ने दिया।

जन्मदिन पर याद किए गए कुवेम्पू
बेंगलूरु. राज्य के विभिन्न स्थानों पर शनिवार को ज्ञानपीठ पुरस्कृत साहित्यकार के.वी. पुट्टप्पा (कुवेम्पू) का 114वां जन्मदिवस मनाया गया। इस अवसर पर उनकी साहित्यिक रचनाओं को लेकर विचार संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1904 में शिवमोग्गा जिले के कुप्पली गांव में एक संपन्न परिवार में जन्म लेने वाले पुट्प्पा को रामायण दर्शन रचना के लिए वर्ष 1968 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार प्राप्त करनेवाले वह पहले कन्नड़ साहित्यकार थे।


उनकी रचना ‘जय भारत जननीय तनुजाते जय हे कर्नाटक माते’ गीत को कर्नाटक के नाडगीते (राज्य का गीत) के रूप में मान्यता मिली है। सभी सरकारी समारोह की शुरुआत इसी गीत से की जाती है। उनकी दूसरी रचना ‘हुलूवा योगी नोडअल्ली’ इस गीत को राज्य सरकार ने किसान गीत के रूप में मान्यता दी है।

शंकर शर्मा
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