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मंदिरों के लिए सरकार ने कर दी वह घोषणा जिसका लोगों को इंतजार था

  • बजट भाषण में मुख्यमंत्री ने की घोषणा

बैंगलोर

Published: March 04, 2022 07:56:53 pm

बेंगलूरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने शुक्रवार को अपने पहले बजट में मंदिरों के लिए स्वायत्तता (autonomy for temples) की घोषणा की। इस तरह से देवस्थान विभाग का मंदिरों पर नियंत्रण समाप्त हो जाएगा।
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मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने अपने बजट भाषण में कहा कि मंदिरों पर सरकारी अधीनता को खत्म करने की मांग लंबे समय से लंबित है। श्रध्दालुओं की इन मांगों पर विचार कर देवस्थान विभाग के दायरे में आने वाले मंदिरों को स्वायत्तता दी जाएगी और विकास कार्यों का फैसला मंदिरों को सौंपने के लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मालूम हो कि हिंदू धार्मिक संस्थान और देवस्थान विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 34,558 मंदिर हैं जिन पर राज्य सरकार का नियंत्रण है।
मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण को खत्म करने के सरकार के फैसले का विपक्षी दल कांग्रेस ने विरोध किया।
मंदिरों को अनुदान बढ़ाया

सरकार ने मंदिरों को दिए जाने वाले अनुदान को मौजूदा 48,000 रुपए से बढ़ाकर 60,000 रुपए कर दिया। इस पैसे का उपयोग बंदोबस्ती विभाग के तहत आने वाले पुजारियों द्वारा फूल, अगरबत्ती आदि पूजा सामग्री प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
मालूम हो कि पिछले साल धर्मांतरण विरोधी विधेयक, 2021 को पारित करने के बाद बोम्मई ने घोषणा की थी कि सरकार मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त' करेगी। देवस्थान विभाग मंत्री शशिकला जोले ने कहा था कि हम अभी भी मंदिरों को मुक्त करने पर अध्ययन कर रहे हैं। हम अन्य राज्यों में इसकी स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
कितने मंदिर, कितनी श्रेणियां

देवस्थान विभाग के अंतर्गत आने वाले लगभग 34,500 मंदिरों को उनके राजस्व संग्रह के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। सालाना 25 लाख रुपए से ज्यादा कमाने वाले मंदिर ए कैटेगरी के हैं, ऐसे करीब 205 मंदिर हैं। 5-10 लाख रुपए के बीच कमाने वाले मंदिर बी श्रेणी में आते हैं, इस श्रेणी में 139 मंदिर हैं। सी श्रेणी में राज्य में लगभग 34,000 मंदिर हैं।
वहीं कांग्रेस के पूर्व राजस्व मंत्री आरवी देशपांडे ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार मंदिरों को मुक्त करके क्या करना चाहती है। मंदिर के धन पर नियंत्रण रखने के लिए नियम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शिता आवश्यक है कि इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए।
वहीं मंदिर पुजारी संघ ने भी इसका विरोध करते हुए कहा है कि यह राज्य में मंदिर के पुजारियों के लिए समस्या पैदा करेगा। सैकड़ों करोड़ जमीन और टन के गहने तत्कालीन राजाओं द्वारा दिए गए हैं। यह सब सुरक्षित है क्योंकि यह सरकार के नियंत्रण में है।
वहीं राज्य में कई लोगों का मानना है कि इस घोषणा का इंतजार था।

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