एक ही गिरोह ने की दाभोलकर, कलबुर्गी और लंकेश की हत्या

एक ही गिरोह ने की दाभोलकर, कलबुर्गी और लंकेश की हत्या

Ram Naresh Gautam | Publish: Sep, 16 2018 11:13:02 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

एक-एक कर खुलने लगी हैं परतें
गौरी लंकेश की हत्या में प्रयोग किया गया मोटरसाइकिल भी जब्त!

बेंगलूरु. पत्रकार गौरी लंकेश तथा तर्कवादी एमएम कलबुर्गी और नरेंद्र दाभोलकर की हत्याओं के पीछे दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं के एक ही समूह का हाथ है। यह बात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कही है।
हालांकि, तर्कवादी एवं साम्यवादी नेता गोविंद पनसारे हत्या की हत्या का सुराग अभी तक पुलिस नहीं ढूंढ पाई है। गोविंद पनसारे की हत्या में इन समूहों का हाथ है या नहीं इसका लिंक अभी स्थापित नहीं हो पाया है। जांच के दौरान अभी तक यह स्पष्ट हुआ है कि समान सोच वाले गिरोह के सदस्य ही दाभोलकर, गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी की हत्या में शामिल हैं। वहीं, इस गिरोह के लगभग सभी सदस्यों का संबंध सनातन संस्था और उसकी शाखा हिंदू जनजागृति समिति से है। पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि दाभोलकर, कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या इस गिरोह के सदस्यों ने इसलिए की क्योंकि वे ंिहंदू धर्म के खिलाफ अवाज उठा रहे थे।
उन्होंने कहा कि अब तक हुई जांच से यह संकेत मिलता है कि पालघर जिले के नालासोपारा से विस्फोटकों के बड़े जखीरे की जब्ती के संबंध में जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया उनका सीधा संबंध दाभोलकर, कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या से है। इस बीच गोविंद पनसारे की हत्या के मामले की जांच की जारी है। हत्यारों को पकडऩे के लिए महाराष्ट्र विशेष जांच दल (एसआईटी) प्रयास कर रहा है।
नरेंद्र दाभोलकर की हत्या अगस्त 2013 में पुणे में हुई थी। पनसारे को कोल्हापुर में 16 फरवरी 2015 को गोली मारी गई और 20 फरवरी को उन्होंने दम तोड़ दिया। उसी वर्ष 30 अगस्त 2015 को धारवाड़ में एमएम कलबुर्गी को उनके घर के प्रवेश द्वार पर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गौरी लंकेश की हत्या 5 सितम्बर को राज राजेश्वरीनगर स्थित उनके आवास पर कर दी गई थी। इन हत्याओं की जांच कर रही पुलिस को पिछले महीने नालासोपारा में विस्फोटकों का एक बड़ा जखीरा हाथ लगा। इस सिलसिले में महाराष्ट्र पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने दावा किया कि दाभोलकर, पनसारे, कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्याओं सहित सभी ज्ञात और अज्ञात मामलों में उनकी भूमिका की जांच की जाएगी।
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किए गए एक आरोपी शरद कालसकर ने दाभोलकर की हत्याकांड में अपनी संलिप्तता कबूल की। उसी निशानदेही पर दाभोलकर हत्याकांड की जांच कर रही महाराष्ट्र आतंकवादी निरोधी दस्ता (एटीएस) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने औरंगाबाद से सचिन अंदुरे को गिरफ्तार किया। कथित तौर पर कालसकर और अंदुरे ने ही दोभोलकर पर दो पिस्तौल से गोली चलाकर हत्या की। इससे पहले सीबीआई ने विरेंद्र सिंह तावड़े को गिरफ्तार किया जो कथित तौर पर इन हत्याओं का मास्टरमाइंड है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि दाभोलकर, कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्याओं की योजना बनाने से लेकर उसके क्रियान्वयन तक में अहम भूमिका निभाई। वहीं गौरी लंकेश हत्याकांड की जांच कर रही एसआईटी ने पुणे के एक इंजीनियर अमोल काले को गिरफ्तार किया जिसकी डायरी में समूह के अन्य सदस्यों के नाम और मोबाइल नंबर मिले। इसमें वैभव राउत, सुधन्वा गोंडलेकर, शरद कालसकर आदि के नाम शामिल है। कालसकर बेंगलूरु भी आया था और गौरी लंकेश के आवास की रेकी की थी।
उधर, महाराष्ट्र एटीएस ने राज्य की एसआइटी द्वारा गिरफ्तार भरत कुरने और सुजीत कुमार को भी जांच के लिए अपनी हिरासत में लिया है। दरअसल, कुरने और सुजीत का नाम उस समय सामने आया जब महाराष्ट्र एटीएस ने नालासपोरा, पुणे और औरंगाबाद में की गई छापेमारी के बाद जब्त किए गए कंप्यूटर के आंकड़े, दस्तावेज और डायरी आदि खंगाल रही थी। सुजीत कुमार उर्फ प्रवीण एमएम कलबुर्गी हत्याकांड में वांटेड है।
राज्य की एसआइटी की जांच में पता चला कि अजीत कुमार ने ही कलबुर्गी पर गोली चलाई थी। कुरने और सुजीत महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों के साथ हथियार चलाने एवं विस्फोटकों के प्रयोग का प्रशिक्षण लिया था। कुरने बेलगावी में एक रिसोर्ट का मालिक है और उसने गौरी लंकेश की हत्या करने वाले आरोपियों को शरण दी थी। खानापुर में उसके तीन एकड़ जमीन का उपयोग अग्नेयास्त्रों चलाने के प्रशिक्षण के लिए उपयोग में लाया गया। इस बीच महाराष्ट्र एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गौरी लंकेश की हत्या के लिए उपयोग में लाए गए मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया गया है।

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