छोटी से छोटी घटना प्रेरणा प्रदीप बन जाती है

साध्वी प्रतिभाश्री के प्रवचन

बेंगलूरु. साध्वी प्रतिभाश्री ने उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन करते हुए कहा कभी-कभी छोटी से छोटी घटना भी किस प्रकार प्रेरणा प्रदीप बन जाती है। यह इश्क समुद्रपालिय 21वें अध्ययन में स्पष्ट होता है। वध्य भूमि की ओर जाते हुए एक अपराधी चोर पुरुष को देख कर समुद्रपाल के अंत: करण की गहराई में संवेग का दीपक जल उठा। इसके दिव्या आलोक में वह स्वयं को, अपने जीवन को और कर्म विपाक से दुखी जीव लोक को देख कर जागृत हो जाता है और तत्काल ही माता-पिता की अनुमति लेकर दीक्षित हो जाता है। दीक्षा लेकर बड़ी सजगता के साथ वह चारित्र का पालन करता है, दृढ़तापूर्वक परिषहों को सहता है और प्रिय अप्रिय संयोगों में समभाव रखते हुए अंत में समस्त कर्मों का क्षय करके समुद्रपाल भव समुद्र को पार कर जाता है। कर्म विपाक का चिंतन एवं संयम में जागरूकता यही इस अध्ययन का मुख्य संदेश है।
रथनेमिय नामक 22 वें अध्ययन में तीन मुख्य पात्र है भगवान अरिष्ठनेमी, राजीमती तथा भगवान का छोटा भाई रथनेमी। अध्ययन के प्रारंभ में करुणावतार अरिष्टनेमी मूक जीवों की हिंसा में स्वयं को निमित्त ना बनने देने का दृढ़ संकल्प लेकर विवाह मंडप से अविवाहित लौट जाते हैं और दीक्षा ग्रहण कर लेते हैं। जीव दया के प्रसंग में यह घटना इतिहास का प्रकाश स्तंभ है।
केशी-गौतमीय नामक 23 वें अध्ययन में भगवान पारसनाथ सन्तानीय केशिकुमार एवं भगवान महावीर के प्रथम गणधर गौतम स्वामी के मध्य हुई आचार सम्बन्धी चर्चा का सुंदर वर्णन है। इस प्रवचन माता नामक 24वें अध्ययन में पंच महाव्रतों की रक्षा व अनुपालना करने वाली पांच समिति व तीन गुप्ति रूप प्रवचनमाता का वर्णन है, जिसमें संयमी जीवन, विवेक व यतना के साथ मन, वचन तथा काया के संगोपान का भी उपदेश है।

Yogesh Sharma
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