सूर्य से हजार गुणा बड़े तारे में होने वाला है महाविस्फोट!

हमारी आकाशगंगा में होगा ये अद्भूत नजारा
विस्फोट के बाद विसरित होगी आपार ऊर्जा
तारे की घटती चमक दे रही धमाके का संकेत

बेंगलूरु.
बीटलजज हमारी आकाशगंगा का 12 वां सबसे चमकीला तारा रहा है जिसका भारतीय नाम आद्र्रा नक्षत्र है। यह एक बार फिर सुर्खियों में है। मृग तारा समूह में स्थित यह तारा कई वर्षों से भावी सुपरनोवा के रूप में बताया जाता रहा है। इसकी चमक घटती-बढ़ती है यह बात तो सन 1836 से ही पता है लेकिन, कुछ समय से इसकी घटती चमक से वैज्ञानिक चमत्कृत हो गए हैं। अब लगने लगा है कि यह फटने वाला है।
भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि यह घटना अब से लेकर कभी भी घटित हो सकती है। इसमें एक साल लगता है तो 100 साल या शायद एक लाख साल भी। लेकिन, पिछले कुछ समय से इसकी चमक में जो घटाव होता रहा है वह अब थमता दिख रहा है। इसके चलते यह आकाश में 21 वां चमकीला तारा हो कर रह गया है। इस घटना को लेकर विश्व की अनेक खगोल वेधशालाएं सतर्क हो गई हैं।
सूर्य से 900 गुणा बड़ा, 19 गुणा भारी
सुपरनोवा विस्फोट से ठीक पहले कोई तारा कैसी हालत में है, विस्फोट के दौरान क्या परिवर्तन होते हैं, इसका अंदाजा है। किंतु हमारे आसपास के अंतरिक्ष में ऐसी घटना वर्ष 1604 के बाद नहीं हुई। ऐसा अनुमान है अब हमारी आकाशगंगा में, हमारे निकट अंतरिक्ष में महाविस्फोट होने का समय आ चुका है। बीटलजज लाल रंग का महाविशाल तारा है। यह सूर्य से 19 गुणा भारी है और सूर्य के आकार से 900 गुणा बड़ा है। यह पृथ्वी से 700 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। अनुमान है पिछले 40 हजार साल में ये फैलकर ऐसे अति विशाल रूप में आया।
जब होगा महाविस्फोट
इसका अंतर भाग एक घने केंद्रक का रूप धारण कर चुका है। जब इस तारे की सारे हाइड्रोजन जलकर हीलियम में बदल जाएगी और तब इसका केंद्रक तेजी से सिकुडऩा शुरू होगा। इस प्रक्रिया में अपार ऊर्जा विसरित होगी और एक बड़े विस्फोट में इस तारे का बाहरी गैसीय वातावरण 20 हजार किमी प्रति सेकेंड से भी अधिक गति से अंतरिक्ष में फैल जाएगा। वहीं, केंद्रक, ध्वस होकर न्यूट्रॉन तारे को जन्म देगा।
विशाल ऊर्जा के विसरण से हो जाएगा चमकीला
हमारी आकाशगंगा में हुए ऐसे विस्फोट कुछ ही हैं जो इतिहास में दर्ज हैं। वर्ष 1006,1054,1572 और 1604 में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। दूर की आकाशगंगाओं में होते ऐसे विस्फोटों का समय-समय पर पता चला है। हमारी आकाशगंगा में जब भी यह होगा तो वह एक अभूतपूर्व नजारा होगा। यह वैज्ञानिकों के लिए एक बेहद रोमांचक क्षण होगा। विस्फोट में फैलते द्रव्य और विशाल ऊर्जा के विकिरण से यह तारा इतना चमकीला हो जाएगा कि वह आकाशगंगा के 200 अरब से अधिक तारों का मुकाबला करेगा।
पांच महीने में 25 फीसदी गिर चुकी है चमक
सितम्बर 2019 से बिटेलजज की चमक 25 फीसदी गिर चुकी है और इसका आकार 9 फीसदी बढ़ गया है। आकाश के तारे बड़ी से बड़ी दूरबीन में भी एक बिंदु सरीखे नजर आते हैं किंतु स्पेकल इंटरफेरोमीटरी जरिए कुछ बड़े आकार के तारों की सतह के रूपकों के बारे में जानकारी मिली है। हाल ही में उच्च विभेदन की तस्वीरों में यह पता चला है कि बिटेलजज की रूपरेखा में कुछ बदलाव हुआ है।
आंतरिक परिवर्तन के दौर में
यूरोपीयन सदर्न ऑब्जरवेटरी की चिली में स्थित वेधशाला के वेरी लार्ज टेलीस्कोप के कैमरे से जनवरी 2019 से ली जा रही इसकी तस्वीरों से पता चला है कि इसका रूप एक समान रूप से चमकती ***** वाला नहीं है। यह रूप विषम है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि या तो इसके आसपास कोई धूल का बादल इसे ढंक रहा है या फिर इसका कुछ हिस्सा ठंडा हो रहा है। इएसओ के वैज्ञानिक डॉक्टर गाइनन का विचार है कि यह परिवर्तन आंतरिक है। जिसमें इसकी अपनी ही गैस के विशाल बादल ठंडे होकर तारे में गिर रहे हैं। तारे में होती आकार वृद्धि यद्यपि आशानुरूप है इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
सूर्य, चंद्रमा के बाद हो जाएगा सबसे चमकीला
विस्फोट की चरम अवस्था में बीटलजज आकाश में सूर्य और चंद्रमा के बाद सबसे अधिक चमकीला होगा। यह चमक काफी समय तक बरकरार रहेगी। यहां तक की इसकी रोशनी में छाया तक देखी जा सकेगी। वर्तमान चमक तक इसके वापस आने में लगभग तीन साल लग जाएंगे। वैज्ञानिकों को बेसब्री से इंतजार है इस सुपरनोवा का।
इसे कहते हैं सुपरनोवा
सुपरनोवा एक ऐसे तारे को कहते हैं जो अपने जीवन के विकास में किसी समय एक महाविस्फोट में अपना अंतरिक्ष में अधिकांश गैसीय पदार्थ छितरा देता है। बचा रहता है इसका ठोस केंद्रीय भाग जो तेजी से सिकुड़कर न्यूट्रॉन स्टार या ब्लैकहोल बन जाता है। इस प्रकार के तारे सूर्य से 20 से 30 गुणा अधिक भारी होते हैं।

Rajeev Mishra Reporting
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