कुडलसंगम में ढाई महीने से मंदिर है बंद, व्यापारी परेशान

  • लॉकडाउन में व्यापार ठप, श्रद्धालुओं का आगमन नहीं

By: Ram Naresh Gautam

Published: 24 May 2020, 06:05 PM IST

इलकल (बागलकोट). इलकल से करीब तीस किलोमीटर की दूरी पर बारहवीं शताब्दी के क्रांतिकारी संत बसवण्णा की पुण्यभूमि एवं कृष्णा, मलप्रभा व घटप्रभा नदियों का संगम स्थल कुडलसंगम एक जाना-माना विश्वविख्यात स्थल है।

नदी किनारे पर स्थित संगमनाथ देवस्थान के दर्शनार्थ एवं नदियों का संगमस्थल देखने के लिए रोजाना हजारों की संख्या में भक्तों का आगमन होता है।

मंदिर परिसर में पूजा सामग्री एवं भावचित्र, विभूति आदि समान बेचने की सौ से ज्यादा दुकानें हैं परन्तु इस वर्ष में यहां व्यापार करने वाले व्यापारियों पर बार-बार मुसीबतें आने से काफी नुकसान हुआ है।

पिछले वर्ष के सितंबर महीने में कृष्णा नदी में बाढ आने से संगमनाथ मंदिर में पानी घुस जाने से मंदिर को थोड़े दिन के लिए बंद किया गया।

मंदिर परिसर में स्थित दुकानों में पानी घुस जाने के कारण से दुकानों में रखा सारा सामान भीग जाने से भारी नुकसान हुआ और कई दिन तक दुकानें बंद रही।

कृष्णा नदी में जब बाढ आई तब श्रावण का महीना था और इस मास में सबसे ज्यादा भक्तों का आगमन होने से व्यापार भी खूब होता है परन्तु बाढ के चलते भक्तों को आने की मनाही की गई थी।

उसका असर पूरी तरह से व्यापार पर हुआ। श्रावण के सीजन में ही बाढ आने से पूरी तरह से व्यापार ठप रहा। व्यापारियों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ।

सरकार ने सिर्फ दस हजार रुपए की फिर से व्यापार शुरू करने के लिए अनुदान राशि दी। मार्च महीने से भक्तों का ज्यादा आगमन होना शुरू हो जाता है।

इस महीने में कुडलसंगम में विशाल पैमाने पर जात्रा महोत्सव का आयोजन होता है। जिनमें लाखों भक्तों का आगमन होने से व्यापार भी भरपूर होता है।

इसके अलावा भी राज्य व दूसरे राज्य एवं विदेशी पर्यटक आसपास के ऐतिहासिक स्थलों जैसे विजयपुर, आइहोले, पट्टदकल व बादामी, आलमट्टी बांध को देखने के लिए आते हैं, वे सभी कुडलसंगम को भी आते हैं।

अब पिछले करीब ढाई महीने से कोरोना महामारी के कारण से लॉकडाउन चल रहा है और मंदिर भी बंद है। लॉकडाउन के कारण से भक्तों का आवागमन नहीं है। ढाई महीने से सारी दुकानें बंद ही है।

दुकानों के बंद रहने से यहां के व्यापारी आर्थिक संकट में आ गए हैं। पिछले सोमवार से व्यापारियों को थोड़ी रियायतें दी गई है। परन्तु मंदिर बंद रहने से भक्तों का आगमन नहीं हो रहा है ऐसी स्थिति में दुकानें खोले तो भी दिन भर खाली बैठना पड़ता है इसलिए अभी तक मंदिर के परिसर की सारी दुकानें बंद ही है।

जिनकी यहां दुकानें यहां है वे अपने भविष्य की चिंता करते हुए हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। इन व्यापारियों को भविष्य की चिंता सता रही है। जब तक कोरोना महामारी नियंत्रण में नहीं आती तब तक भक्तों का आना संभव नहीं है।

दुकानदारों के साथ यहां के होटल, लॉज, भोजनालय वाले भी भक्त व पर्यटकों के नहीं आने से खाली बैठे हैं और भविष्य की चिंता कर रहे हैं।

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