अनेकांत दर्शन को अपनाने से सारा समाधान : मुनि सुधाकर

हनुमंतनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 05 Sep 2020, 10:50 PM IST

बेंगलूरु. हनुमंतनगर में सुधाकर मुनि ने कहा कि सत्य अनंत है। उसके विविध पक्षों को सही परिप्रेक्ष्य में उद्घाटित करने के उद्देश्य से भगवान महावीर ने अनेकांत दर्शन का प्रतिपादन किया। सत्य के साक्षात्कार के लिए उनके अनेकांत दर्शन का अनुसरण अत्यंत आवश्यक है। इस अनेकांत दृष्टि के विकास से ही सत्य का साक्षात्कार संभव है। वस्तुत: होता यह है कि पूर्वाग्रहों के प्रभाव से मनुष्य एकांतवादी और आग्रहवादी हो जाता है। वह सोचता है जो मेरा है वही सत्य है।

इस आग्रह में सत्य छूट जाता है। उसे इस विचार का अनुसरण करना चाहिए कि जो सत्य है वही मेरा है।
मुनि ने कहा कि अनेकांत दर्शन को अपनाने से मनुष्य की सारी पारिवारिक व सामाजिक समस्याओं का समाधान सहजता से हो जाता है। मनुष्य का ज्ञान सीमित होता है।

जब तक उसे अपनी सीमा और मर्यादा का बोध नहीं होता वह बहुत होने की भ्रांति में जीता है। अनेकांतवादी हर पदार्थ का नाना प्रकार की प्रेक्षाओं से दर्शन करता है।

जैन दर्शन में अनेकांत का आध्यात्मिक व व्यावहारिक दोनों दृष्टियों से बहुत महत्व है। मनुष्य में परिग्रह के नशे की तरह ही विचारों का भी नशा होता है। यह नशा उसकी विवेक चेतना को नष्ट कर देता है। परिणाम स्वरुप मनुष्य उचित अनुचित में भेद नहीं कर पाता।

Santosh kumar Pandey Desk
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