धर्मशास्त्र वह जो जगत को सन्मार्ग दिखाए: आचार्य भव्यदर्शन सूरीश्वर

मैसूरु में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 01 Aug 2020, 09:40 PM IST

मैसूरु. सुमतिनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में महावीर भवन में चातुर्मास कर रहे आचार्य भव्यदर्शन सूरीश्वर तथा साध्वी भद्रिकाश्री ने धर्म संदेश मे कहा कि धर्मशास्त्र वह है जो जगत को सन्मार्ग दिखाए।

जीवमात्र को सुख देने का प्रयास करना चाहिए। दूसरे की हिंसा में पहले खुद की हिंसा है। धर्म अहिंसा में है। दूसरे का प्राण लेना इंसान के अधिकार की बात नहीं है।

जैनधर्म सिखाता है कि जैसे अपने प्राण प्रिय है, वैसे सब प्राणियों को अपने प्राण प्रिय हैं। जैसे दूसरे की हिंसा में खुद की हिंसा है, वैसे ही दूसरे की अहिंसा में अपनी अहिंसा भी है।

उन्होंने कहा कि पाप से दु:ख और धर्म से सुख मिलता है। इसलिए पाप छोडक़र धर्म का आचरण करना चाहिए। निष्पाप जीवन ही शाश्वत सुख की राह है। मूक पशुओं की हिंसा से बचने के लिए वृद्ध-अशक्त मां-बाप के भांति पालन-पोषण करना इंसान का कर्तव्य है। इसलिए जैनों ने भारतवर्ष में हजारों पिंजरापोल बनाई हैं। उसमें आज भी लाखों जीवों की देखभाल होती है।

Santosh kumar Pandey Desk
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