प्रभु के चरणों में अपार सुख मिलता है-आचार्य नररत्न

पंन्यास रविप्रभ विजय की पुण्यतिथि मनाई

By: Yogesh Sharma

Published: 06 Apr 2021, 11:00 AM IST

मैसूरु. सुमतिनाथ जैन श्वतांबर मूर्ति पूजक संघ के तत्वावधान में महावीर भवन में विराजित आचार्य नररत्न सूरीश्वर के सान्निध्य में पंन्यास रविप्रभ विजय की 31 वीं पुण्यतिथि मनाई गई। सुबह 6 बजे सुमतिनाथ जिनालय में 31 किलो फूलों का शक्रस्तव अभिषेक किया गया। 9 बजे महावीर भवन में गुरु की गुण कीर्तन सभा हुई। जिसमें गुरुदेव ने कहा कि जिस व्यक्ति को अंदर की खुशी नहीं मिलती है, उसे ही बाहर के साधनों से सुख की इच्छा होती है। जो अंदर से प्रसन्न है वह बाहर की समृद्धि की आकांक्षा नहीं करता। पंन्यास रविप्रभ विजय अंदर से खुश थे। इसलिए संसार के बाहरी पदार्थों का आकर्षण उन्हें नहीं रहा। उन्होंने हमेशा 5 हजार नवकार मंत्र का जाप किया था। आत्म कल्याण की कामना से जीवन पर्यंत गुरु सेवा की थी। आचार्य ने कहा कि हर रोज श्रावक को कर्तव्य परायणता से प्रवचन सुनना चाहिए। सद्गुरु के प्रवचन सुनने से श्रावक का मन अंदर से धर्म की ओर परिवर्तन होता है। साधु-साध्वी जिन शासन की धरोहर है। आशीर्वाद आंखों से प्राप्त होता है। आचार्य को जिन शासन की प्रभावना करना है। जैन अनुयायी को हर रोज अरिहंत के नाम की पचास पक्की माला गिननी चाहिए। प्रभु के चरणों में अपार सुख मिलता है। भगवान की भक्ति सभी सुखों का मूल है। आत्मा के स्वरूप की साधना के लिए मानव जन्म मिला है। प्रवचन का श्रवण करते हुए हमें हमारी आत्मा का जहर पिघलना है। गुरु ऐसा होना चाहिए जो हमारी एक भी गलती को माफ ना करें। जो श्रावक की आत्मा का कल्याण करें ऐसा ही गुरु चाहिए। इस अवसर पर जैन संघ में समूह आयंबिल की आराधना हुई। आज की धर्मसभा में सुमतिनाथ जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ मैसूरु के अध्यक्ष अशोक दांतेवाडिय़ा, ट्रस्टी चंपालाल वाणीगोता, रमेश कटारिया, सुमतिनाथ जैन नवयुवक मंडल अध्यक्ष प्रवीण लुंकड़, सदस्य संदीप संकलेचा, पाश्र्व पद्मावती ट्रस्ट के अध्यक्ष दलीचंद श्रीश्रीमाल मौजूद रहे।

Yogesh Sharma Reporting
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