जीवन से बड़ा कोई चमत्कार नहीं: आचार्य देवेन्द्र सागर

  • शांतिनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 03 Apr 2021, 12:57 PM IST

बेंगलूरु. आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने शांतिनगर के भोमिया भवन में प्रवचन में कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है। प्रकृति ने मनुष्य को उपहार में बहुत कुछ दिया है। उसने हमें आंखें दी हैं।

इन आंखों से हम देख सकते हैं। पर हम इन आंखों से क्या देखते हैं, यह हम पर ही निर्भर करता है। कानों से हम क्या सुनते हैं, यह भी हम पर ही निर्भर है। इन पैरों से चलकर कहां पहुंचेंगे, यह हम पर निर्भर करता है। इस शरीर में सांस आती है, सांस जाती है और फिर हमें एक दिन का मौका मिलता है।

संत-महात्मा बार-बार हमें समझाते हैं कि हम अपने जीवन में जरा देखें कि हमारे लिए जरूरी चीज क्या है। जिस दिन हम अपने हृदय में झांक कर देखेंगे, सब कुछ वहीं मिल जाएगा। परंतु क्या सचमुच अपने हृदय में झांक कर देखा जा सकता है? कहा जाता है, कस्तूरी कुंडल बसे मृग ढूंढत बन मांहि। उसे दिखाने वाला कौन है? इसलिए पहले उसको ढूंढो, जो दिखा सके। जो हृदय के अंदर साक्षात और प्रत्यक्ष रूप में उस सत्य का अनुभव कराए। ऐसे सद्गुरु की खोज करनी है।

लोग तो चमत्कार ढूंढते हैं, चमत्कार क्या है? मनुष्य के अंदर सांस का आना-जाना, यह असली चमत्कार है। वास्तव में यह जीवन ही चमत्कार है, परंतु लोग इसे समझ नहीं पाते हैं। यह तो एक उपहार है और जब हम इसे अपने जीवन में ग्रहण करेंगे, तब हम भी भगवान का लाख-लाख शुक्रिया अदा करना शुरू करेंगे। हर एक सांस की कीमत पहचानना शुरू करेंगे। उस दिन से हम सच्चे अर्थ में जीना शुरू करेंगे।

Santosh kumar Pandey Desk
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