भारतीय नौवहन सेवाओं पर कोई असर नहीं: इसरो

Shankar Sharma

Publish: Sep, 16 2017 09:28:30 (IST)

Bangalore, Karnataka, India
भारतीय नौवहन सेवाओं पर कोई असर नहीं: इसरो

आठवें नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस 1 एच के प्रक्षेपण में मिली असपलता के बावजूद भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली ‘नाविक’ की सेवाओं पर कोई असर नहीं

बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष ए.एस.किरण कुमार ने कहा कि आठवें नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस 1 एच के प्रक्षेपण में मिली असपलता के बावजूद भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली ‘नाविक’ की सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़़ा है।


यहां शुक्रवार को इसरो की वाणिज्यिक इकाई एंट्रिक्स के रजत जयंती समारोह के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए किरण कुमार ने कहा कि नाविक प्रणाली द्वारा प्रदान की जा रही सेवाएं अब भी सर्वश्रेष्ठ हैं और इसमें कोई कमी या गुणवत्ता में गिरावट नहीं आई है। यह प्रणाली देश के 1500 किलोमीटर दायरे में लगातार नौवहन सेवाएं उपलब्ध करा रही है।

उन्होंने कहा कि आठवां नौवहन उपग्रह को दुबारा भेजने को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है लेकिन, इस श्रृंखला में सिर्फ एक उपग्रह कम है और इसरो नहीं चाहता है कि यह स्थिति बनी रहे। जहां तक नाविक प्रणाली के प्रदर्शन का सवाल है तो यह शानदार है और प्रतिस्थापन उपग्रह को लेकर जल्दबाजी जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि पीएसएलवी सी-39 मिशन की विफलता के कारणों की पहचान कर ली गई है और जल्दी ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी। वैज्ञानिक सिमुलेशन के जरिए असली वजह तक पहुंच रहे हैं।

विफलता की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है जो इस विषय पर विस्तार से आपस में चर्चा कर रही है। बहुत जल्दी विफलता के कारणों की घोषणा कर दी जाएगी। इसरो अध्यक्ष ने कहा कि जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद इसरो अगले प्रक्षेपण की तैयारी करेगा। नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस 1 एच का रिप्लसमेंट इसी वर्ष दिसम्बर तक भेजने की उम्मीद है।

तैयार हो रहा चंद्रयान-2
दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 की तैयारियों के बारे में इसरो अध्यक्ष ने कहा कि फ्लाइट हार्डवेयर की एसेंबलिंग हो रही है और उसका परीक्षण किया जा रहा है। इसरो ने अगले वर्ष की पहली तिमाही में इसके प्रक्षेपण का लक्ष्य रखा है। एक सवाल के जवाब में इसरो अध्यक्ष ने कहा कि जीएसएलवी मार्क-2 रॉकेट भी विदेशी उपग्रहों के वाणिज्यिक प्रक्षेपण को तैयार है। जीएसएलवी मार्क-2 की जो प्रक्षेपण क्षमता है उस वर्ग में भी विश्व को उपग्रहों के प्रक्षेपण की आवश्यकता है। एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन भविष्य में इसके लिए वाणिज्यिक करार कर सकता है।

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