मायावी स्वरूप के सामने कोई मूल्य नहीं-डॉ. महाप्रज्ञा

धर्मसभा

By: Yogesh Sharma

Published: 16 Sep 2020, 11:42 AM IST

बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टनम के दिवाकर गुरु मिश्री दरबार में साध्वी डॉ. कुमुदलता आदि ठाणा विराजमान है। साध्वी डॉ. महाप्रज्ञा ने कहा कि कोई भी मनुष्य यही सोचता है कि उसका सही स्वरूप किसी को पता न चले। विश्वासघात, छल-कपट, धोखा, दंभ प्रपंच वगैरह करने में मित्रों, स्वजनों और यहां तक कि अपने माता पिता को भी नहीं छोड़ता है।
बाहर की अच्छी पैकिंग दिखाकर अंदर नकली माल डालकर बेचने में, अच्छा माल दिखाकर खराब माल देने में उसको अपनी होशियारी से कुशलता के दर्शन होते हैं। सभी जगह छाप पडऩे लगती है और वह प्रसिद्ध हो जाता है। इंसान पल-पल में रंग बदलता गिरगिट या पलभर में नष्ट होने वाले संध्या के रंग, क्षणभर में अदृश्य होने वाला पानी का परपोटा या क्षणभर में बिखरने वाले मेघ धनुष के रंग, इन सबका मायावी स्वरूप के सामने कोई मूल्य नहीं रहता है। असली स्वरूप को इस माया के कारण कोई समझ नहीं सकता। कभी कभी तो इंसान भी अपनी दंभी एवं मायावी स्वरूप को सही मान लेता हैं। चारों तरफ माया रूपी नागिन के जाल का डेरा डाला हुआ होता है ।
एक चोर के शिकंजे में फंसने वाला भी हैरान परेशान हो जाता है तो इंसान तो लगभग चार-चार चोरों के चक्कर में फंसा हुआ है। कैसी दयनीय दशा है इसकी कल्पना कोई कर ही नहीं सकता है। अंत में थकान लगी, जिगर के आंसू कम हो गए। गिरगिट के सभी रंग बदलने लगे। सारी पोल खुल जाएगी ये सोचकर सुख चैन व नींद दोनों ***** हो गए। ख्याति व प्रसिद्धि भी उसे भार रूप लग गई। विनोद दरला ने बताया कि श्रीरंगपट्टनम जिले की तहसीलदार के.वी.रूपा, सपना सिंघवी, इंद्रा गादिया, पुष्पाबाई आच्छा, पदम आच्छा, संतोषबाई आच्छा, सज्जनबाई शर्मा, इन्द्रा गादिया, पंडित भानुप्रकाश शर्मा, पारसमल गोलेच्छा, कांतिलाल गोटावत, आनंद चोरडिय़ा ने साध्वीवृन्द के दर्शन किए।

Yogesh Sharma Reporting
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