यह है राज्य की सबसे चर्चित सीट, 80 फीसदी से अधिक हुआ मतदान

यह है राज्य की सबसे चर्चित सीट, 80 फीसदी से अधिक हुआ मतदान

Santosh Kumar Pandey | Publish: Apr, 21 2019 05:39:30 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

लोकसभा चुनावों के दूसरे चरण में 18 अप्रेल को ओल्ड मैसूरु क्षेत्र में मतदान प्रतिशत अधिक रहने के प्रभावों का आकलन शुरू हो गया है। अधिक मतदान का पैटर्न कांग्रेस व जनता दल-एस गठबंधन की संभावनाओं और भाजपा की उम्मीदों को किस तरह प्रभावित करेगा, इस पर विश्लेषण हो रहा है।

बेंगलूरु. लोकसभा चुनावों के दूसरे चरण में 18 अप्रेल को ओल्ड मैसूरु क्षेत्र में मतदान प्रतिशत अधिक रहने के प्रभावों का आकलन शुरू हो गया है। अधिक मतदान का पैटर्न कांग्रेस व जनता दल-एस गठबंधन की संभावनाओं और भाजपा की उम्मीदों को किस तरह प्रभावित करेगा, इस पर विश्लेषण हो रहा है।

दरअसल, ओल्ड मैसूरु कांग्रेस-जद-एस का पारंपरिक गढ़ रहा है और दोनों ही पार्टियां यहां एक-दूसरे को चुनौती देती रही हैं, लेकिन गठबंधन के कारण भाजपा को यहां सीधे मुकाबले में आने का अवसर मिल गया। इससे कई ऐसे क्षेत्र जहां भाजपा की मौजूदगी नगण्य थी, वहां भी उसे पैर रखने का मौका मिल गया है।

चीनी के कटोरे के उपनाम से मशहूर मंड्या दूसरे चरण के लोकसभा चुनाव के केंद्र में रहा, जहां कांग्रेस के कुछ जमीनी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जद-एस उम्मीदवार निखिल को वोट देने के पार्टी के निर्देश के खिलाफ बगावत कर दी थी। अब उच्च मतदान प्रतिशत से पेचीदगी और बढ़ गई है। क्या यह उच्च मतदान प्रतिशत निखिल के पक्ष में जाएगा या भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुमालता अंबरीश की संभावनाओं को बेहतर बनाएगा।

सबके अपने दावे, अपने तर्क
नाराज कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता खुलेआम सुमालता का समर्थन करते नजर आए। यहां मतदान प्रतिशत 80.24 फीसदी रहा है। अब दोनों ही पक्ष उच्च मतदान को अपने पक्ष में होने का दावा कर रहे हैं। वर्ष 2014 के चुनाव में मंड्या में 70.23 फीसदी मतदान हुआ था, लेकिन इस बार उसमें 10.01 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं नवम्बर में हुए उपचुनावों में 53.93 फीसदी मतदान हुआ था जिससे 26.31 फीसदी ज्यादा मतदान इस बार हुआ है।

जद-एस नेताओं का दावा है कि मतदान प्रतिशत में यह बढ़ोतरी गठबंधन दलों के मतदाताओं की एकजुटता के कारण हुई है। लेकिन, सुमालता के समर्थकों का कहना है कि यह मतदाताओं का बढ़चढ़ कर भाग लेना यह साबित करता है कि जनता बदलाव चाहती है। दर्शन और यश जैसे कन्नड़ फिल्मी सितारों के गहन चुनावी अभियान का भी व्यापक असर हुआ है। इससे भी मतदाता बड़े पैमाने पर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित हुए।

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