इस बार बहुत प्यारी होगी पूनम की रात बना दुर्लभ संयोग

इस बार बहुत प्यारी होगी पूनम की रात बना दुर्लभ संयोग

Santosh Kumar Pandey | Publish: Mar, 17 2019 03:45:41 PM (IST) | Updated: Mar, 17 2019 03:45:42 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

कई खगोलीय घटनाओं ने आगामी 21 मार्च को एक विशेष दिन बना दिया है। संयोग ऐसे बने हैं जो बार-बार नहीं बनते। वर्ष 1905 के बाद केवल यह दूसरा अवसर है जब यह दुर्लभ संयोग बना है।

बेंगलूरु. कई खगोलीय घटनाओं ने आगामी 21 मार्च को एक विशेष दिन बना दिया है। संयोग ऐसे बने हैं जो बार-बार नहीं बनते। वर्ष 1905 के बाद केवल यह दूसरा अवसर है जब यह दुर्लभ संयोग बना है।

भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि आगामी 20/21 मार्च को वसंत विषुव (दिन रात बराबर यानी 12-12 घंटे के) है किंतु यह विलक्षण है। क्योंकि, इस दिन पूर्णिमा है और सुपरमून की स्थिति भी है। सुपरमून की स्थिति तब होती है जब पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से निकटतम बिंदु के आसपास होता है।

वर्ष 1905 के बाद यह पहला अवसर है कि बसंत विषुव के इतने निकट न सिर्फ पूर्णिमा है बल्कि सुपरमून की स्थिति भी है। यही स्थिति वर्ष 2038 में भी होगी जब वसंत विषुव के दिन इससे भी बेहतर सुपरमून की पूर्णिमा होगी। वर्ष 1901 से लेकर 2050 के बीच के 150 वर्ष के अंतराल में यहीं तीन स्थितियां हैं जब पूर्णिमा का सुपरमून वसंत विषुव के दिन हुआ या होना है। इस बीच कुछ विषुव पूर्णिमाएं भी हैं किंतु सुपरमून नहीं है। दरअसल, सुपरमून एक लुभावनी पूनम की रात होती है जब चंद्रमा सामान्य से थोड़ा बड़ा और अधिक चमकीला होता है। 2019 का यह अंतिम सुपरमून भी होगा।

प्रो. कपूर बताया कि इस वर्ष वसंत विषुव की स्थिति 21 मार्च की प्रात: 3.28 बजे (भारतीय समयानुसार) है। इसके बाद दिन 12 घंटे से अवधि का और रात छोटी होने लगती है। घट-बढ़ का यह सिलसिला 21 जून तक चलता है। उसके बाद दिन छोटा और रात बड़ी होने लगती है। इस सबका कारण है पृथ्वी का अक्ष। पृथ्वी की कक्षा अपने अक्ष पर 20.5 डिग्री झुकी हुई है।

इस झुकाव के कारण पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश उत्तरी और दक्षिणी गोलाद्र्ध पर समान रूप से नहीं पड़ता। गर्मियों में यह उत्तरी गोलाद्र्ध पर अधिक क्षेत्र में पड़ता है और सर्दियों में दक्षिणी गोलाद्र्ध पर अपेक्षाकृत अधिक क्षेत्र में पड़ता है। विषुव ही वह स्थिति है जब दोनों गोलाद्र्धों पर सूर्य की रोशनी बराबर पड़ती है। वसंत हो या शरद विषुव इन दोनों दिनों में सूर्योदय और सूर्यास्त ठीक पूर्व-पश्चिम की दिशा में होती है।

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned