इस बार कलघटगी के मतदाताओं ने दिया भाजपा का साथ

Shankar Sharma

Publish: May, 17 2018 10:43:40 PM (IST)

Bangalore, Karnataka, India
इस बार कलघटगी के मतदाताओं ने दिया भाजपा का साथ

कलघटगी विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने इस बार स्थानीय प्रत्याशी भाजपा के सी.एम. निंबण्णवर का साथ दिया।

हुब्बल्ली. कलघटगी विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने इस बार स्थानीय प्रत्याशी भाजपा के सी.एम. निंबण्णवर का साथ दिया। कलघटगी विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो बार भारी मतों से कांग्रेस विधायक के रूप में निर्वाचित होकर मंत्री बने संतोष लाड को कलघटगी की जनता ने इस बार बाहर का रास्ता दिखाया है।


भाजपा के निंबण्णवर ने 8 3 हजार 26 7 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की है तो इनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के संतोष लाड ने 57 हजार 270 वोट हासिल कर 25 हजार 997 वोटों के अंतर से हार स्वीकार की है। बल्लारी जिले के संडूर से कलघटगी पलायन कर आए संतोष लाड ने 2008 तथा 2013 के चुनाव में निंबण्णवर के खिलाफ ही जीत हासिल की थी परन्तु लाड ने स्थानीय जनता की समस्याओं को आपात मौकों पर प्रतिक्रिया नहीं दी। खास तौर पर यात्रा, कारोबार कह कर घूमने वाले लाड जनता को उपलब्ध नहीं होने की शिकायत आम थी। इससे क्षेत्र के मतदाता लाड जहां पर भी प्रचार के लिए गए वहां खुल कर आक्रोश व्यक्त किया था।

जनता ने उनसे पूछा कि दस वर्षों से सत्ता में रहकर अपने क्षेत्र के लिए आपने क्या किया। इतने वर्षों तक हमारे क्षेत्र की सत्ता दूसरे शहर के व्यक्ति के हाथ में देकर देख लिया अब कोई भी हो स्थानीय व्यक्ति को ही समर्थन देने का फैसला स्थानीय जनता ने किया था। इन सबको गम्भीरता से लिए बिना ही जनता के विश्वास को हासिल करने में विफल रहे लाड जहां हाथी चलेगा वही रास्ता माना जाएगा यह मान कर चल रहे थे।

इन सबको गम्भीरता से देख रहे निंबण्णवर पांच वर्षों से क्षेत्र को छोड़ कर कहीं नहीं गए। स्थानीय जनता के दु:ख-दर्द में शामिल होकर वे उनका विश्वास हासिल करने में सफल हुए थे। इसी दौरान भाजपा ने कलघटगी विधानसभा क्षेत्र के लिए महेश टेंगिनकाई को टिकट की घोषणा की थी।

इससे नाराज निंबण्णवर ने अपने समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन कर केंद्र तथा राज्य स्तर के नेताओं का ध्यान आकर्षित किया था। हालात तथा जीत का गणित बैठाकर नेताओं ने आखिर में सचेत होकर महेश टेंगिनकाई के बदले निंबण्णवर को टिकट की घोषणा की। पिछले दो चुनाव में हार के बाद भी जनता के बीच ही रहने से निंबण्णवर की जीत आसान हुई।

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