तीर्थंकर बदलते हैं भक्त का जीवन: डॉ. समकित मुनि

शूले स्थानक में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 23 Oct 2020, 10:24 PM IST

बेंगलूरु. अशोकनगर शूले जैन स्थानक में श्रमण संघीय डॉ. समकित मुनि ने कहा कि जगत के जीव में जो अंधकार व्याप्त है जिसके कारण से जीव संसार में परिभ्रमण करता है, उस अंधकार को खत्म करने में जिनभास्कर (तीर्थंकर) सक्षम हैं। तीर्थंकर परमात्मा जीवों में सकारात्मक शक्ति का संचार करते हैं।

जिस कारण से व्यक्ति का पाप के प्रति आकर्षण कम हो जाता है। पहले जिस शक्ति से व्यक्ति पाप करता था परमात्मा की शरण पाने के बाद वह व्यक्ति उस शक्ति का उपयोग धर्म की आराधना में करता है। पाप की ताकत इंसान को पशु बना देती है। पाप के प्रति आकर्षण व्यक्ति को हैवान बना देता है। तीर्थंकर केवल बाहरी परिवर्तन नहीं करते, भक्त का पूर्णत: जीवन बदल देते हैं।

फूल को कांटा बनाने वाले दुनिया में अनेकों है परंतु ज्वालामुखी को शांत जल का दरिया बनाने वाले तीर्थंकर हैं।
मुनि ने कहा कि इन घटनाओं से एक यही सार निकलता है कि हमारी बेईमानी सज्जन को शैतान बनने के लिए मजबूर करती है। फिर वह सज्जन से बना शैतान न जाने कितने लोगों के लिए कहर बन कर टूटता है। किसी के साथ अच्छा कार्य करने पर उसका सत्कार होना चाहिए।

Santosh kumar Pandey Desk
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