प्रथम पूज्य गणेश का जन्मोत्सव आज

मंदिरों में होंगे अनेक आयोजन

By: Yogesh Sharma

Published: 10 Sep 2021, 07:55 AM IST

बेंगलूरु. प्रथम पूज्य भगवान गणेश का जन्मोत्सव शुक्रवार को मनाया जाएगा। शास्त्रानुसार गणेश पूजन का श्रेष्ठ समय वृश्चिक लग्न सहित मध्यकाल माना जाता है। वृश्चिक लग्न दिवा 11:31 से 1:48 तक, दिवा 12:10 से 1:00 बजे तक अभिजीत वेला में पूजन श्रेष्ठ रहेगा। पंडित वेदप्रकाश दवे के अनुसार गणपति का जन्म विजय अभिजीत मुहूर्त में हुआ था और इसके पश्चात चित्रा नक्षत्र समाप्त हो रहा है। गणपति का जन्म चित्रा नक्षत्र में हुआ था। अत: चित्रा नक्षत्र में स्थापना करना श्रेष्ठ रहेगा। गणेश के पूजन के समय प्रसाद के लिए बेसन या बूंदी के लड्डू या गुड़ धानी का प्रयोग किया जा सकता है। धूप, दीप, लाल चंदन, मोती, चावल, पुष्प, दूर्वा, जनेऊ सिंदूर आदि से भक्ति भाव से गणेश जी का पूजन करना चाहिए। गणेश अर्थवशीश का पाठ करने से गणेश जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं। कष्टों से निवारण और शत्रु बाधा से बचने के लिए ओम गं गणपते नम: का पाठ करना उत्तम रहेगा। खील से पूजा करना मान सम्मान दिलाता है। वही धन धान्य वृद्धि के लिए गणेश जी के साथ लक्ष्मी की पूजा प्रत्येक शुक्रवार को करनी चाहिए। सुख समृद्धि व संतान प्राप्ति के लिए गणेश जी पर प्रत्येक बुधवार को सिंदूर चढ़ाना शुभ होता है। गणेश जी के समय उनके पिता भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय एवं दोनोंपत्नी रिद्धि सिद्धि दोनों पुत्र लाभ व शुभ का ध्यान करना चाहिए। धर्म शास्त्रों के अनुसार आप गणेश प्रतिमाओं को 1,2,3,5,7 दिन तक स्थापित कर पूजन कर सकते हैं। इसके बाद विधि पूर्वक उनका विसर्जन करें। भगवान गणपति की बैठी हुई मुद्रा की प्रतिमा लाना शुभ होता है। स्थापना करने से पहले कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। दवे ने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन करने से कलंक लगता है। गणेश को लाल पुष्प व कनेर के पुष्प अति प्रिय हैं। उन्होंने बताया कि सुबह ७:३५ से १०:२५ तक लाभ, अमृत वेला में भगवान गणपति की स्थापना कर सकते हैं।

Yogesh Sharma Reporting
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