बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) रविवार को दो ब्रिटिश उपग्रहों - नोवासार-1 और एस1-4 का प्रक्षेपण करेगा। इस पूर्ण वाणिज्यिक मिशन के लिए उलटी गिनती शनिवार दोपहर 1.08 बजे शुरू हो गई। लगभग 33 घंटे की उलटी गिनती के बाद रविवार रात 10.08 बजे इसरो अपने विश्वसनीय रॉकेट धु्रवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएसलवी सी-42) दोनों उपग्रहों का प्रक्षेपित करेगा।
इसरो की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार उलटी गिनती सुचारू रूप से चल रही है। पीएसएलवी की इस मिशन के तहत दोनों ब्रिटिश उपग्रहों को अंतरिक्ष में 583 किलोमीटर सूर्य समकालिक कक्षा (एसएसओ) में छोड़ा जाएगा। दोनों उपग्रहों का संयुक्त वजन 889 किलोग्राम है और इनके प्रक्षेपण के लिए इसरो पीएसएलवी के मूल स्वरूप यानी कोर अलोन वर्जन का उपयोग कर रहा है।
दरअसल, पीएसएलवी दो रूपों में उपलब्ध है। कोर अलोन संस्कण और विस्तारित संस्करण। विस्तारित संस्करण में छह अतिरिक्त स्ट्रैपवंस का उपयोग किया जाता है। पीएसएलवी अधिकतम 1600 किलोग्रम वजनी उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर सकता है।
नोवासार एस-बैंड सिंथेटिक अपर्चर राडार उपग्रह है जो 445 किलोग्राम वजनी है। इसके साथ एस-बैंड सार-पे-लोड और ऑॅटोमेटिक आईडेंटिफिकेशन रिसीवर है। इसका उपयोग मुख्य रूप से जंगलों के नक्शे, वर्षा से अच्छादित जमीन के निरीक्षण, बाढ़ एवं आपदा निरीक्षण, जहाजों का पता लगाना एवं समुद्री निरीक्षण के लिए किया जाएगा। वहीं एस1-4 एक भू-अवलोकन उपग्रह है। एस1-4 का वजन 444 किलोग्राम है और यह संसाधनों के अवलोकन, पर्यावरण का निरीक्षण, शहरी विकास प्रबंधन, आपदा निरीक्षण आदि के लिए किया जाएगा। इन उपग्रहों का निर्माण ब्रिटिश कंपनी सर्रे सैटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड (एसएसटीएल) ने किया है और प्रक्षेपण के लिए इसरो की वाणिज्यिक इकाई अंतरिक्ष लिमिटेड के साथ करार किया है। इससे पहले इसरो ने एक पूर्ण वाणिज्यिक उड़ान के तहत 10 जुलाई 2015 को पीएसएलवी सी-28 से पांच ब्रिटिश उपग्रहों का एक साथ प्रक्षेपण किया था।

ब्रिटिश कंपनी सर्रे सैटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड (एसएसटीएल) के अधिकारियों की टीम भी श्रीहरिकोटा में मौजूद है। साथ इसरो अध्यक्ष के. शिवन सहित अन्य अधिकारी और वैज्ञानिक भी श्रीहरिकोटा में मौजूद हैं।

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