पॉलिश्ड चावल नवजातों के कोमल हृदय को कर सकता है बीमार

जेआइसीएसआर के निदेशक डॉ. सी. एन. मंजुनाथ ने बताया कि अनाज, दाल, फलिया, रागी, बाजरा, आलू, दूध, बादाम और मांस में विटामिन बी1 प्रचुर मात्रा में मिलता है। लोगों को सही आहार के सेवन के प्रति जागरूक करने में शोध की भूमिका अहम है। इस अध्ययन में सामने आए तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि सरकार को भी गर्भावस्था कार्यक्रमों में विटामिन बी1 से भरपूर खाद्य पदार्थों पर ध्यान देने की जरूरत है।

By: Nikhil Kumar

Published: 16 Sep 2020, 06:20 PM IST

- विटामिन बी 1 की कमी खतरनाक
- जेआइसीएसआर के छह वर्षीय अध्ययन में खुलासा

बेंगलूरु. नवजातों के हृदय की कार्य प्रणाली और मां के भोजन में सीधा संबंध है। चमकाए हुए चावल (पॉलिश्ड राइस) के अत्याधिक सेवन से शिशु में विटामिन बी 1 (वैज्ञानिक नाम थायमिन हाइड्रोक्लोराइड) की कमी होती है। जिसके कारण हृदय संबंधित बीमारियां होती हैं। चावल में विटामिन बी1 मौजूद रहती है। लेकिन पॉलिश होने के बाद चावल थायमिन विहीन हो जाता है।

जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्क्यूलर साइंसेस एंड रिसर्च (जेआइसीएसआर) ने छह वर्ष से चल रहे अपने एक अध्ययन में इसका खुलासा किया है। पीडियाट्रिक कार्डियोलोजिस्ट डॉ. उषा एम. के. और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जय रंगनाथ ने वर्ष 2013 से वर्ष 2019 तक इन बच्चों पर अध्ययन किया।

अध्ययन में छह माह से कम उम्र के 250 ऐसे शिशुओं को शामिल किया गया जिन्हें उल्टी, सांस तेज चलने और गहरी सांस लेने में गंभीर परेशानी थी। अध्ययन के दौरान हृदय के दाए हिस्से सहित फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में सामान्य से ज्यादा दबाव होने की बात सामने आई। इस अवस्था को पल्मोनरी हाइपरटेंशन कहा जाता है। इसके कारण हृदय का दाया हिस्सा फेल हो सकता है।

डॉ. उषा ने बताया कि नसों के जरिए विटामिन बी1 देने के 24 से 48 घंटे में 250 में से 231 शिशु ठीक हो गए। उपचार के 60 माह बाद तक इन शिशुओं के स्वास्थ्य पर ध्यान रखा गया। पल्मोनरी हाइपरटेंशन की समस्या नहीं हुई।

उन्होंने बताया कि ठीक होने वाले 231 शिशुओं में से ज्यादातर को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। 250 में सात शिशु का बचाया नहीं जा सका।12 शिशु पर विटामिन बी1 का असर नहीं हुआ। चार शिशु को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। नसों के माध्यम से विटामिन बी1 का इंजेक्शन देने के पांच से छह घंटे में शिशु वेंटिलेटर से हटाने लायक हो गए थे।

डॉ. रंगनाथ ने बताया कि आंध्र प्रदेश, उत्तर पूर्व, ओडिसा सहित कर्नाटक के चिकबल्लापुर, कोलार, चित्रदुर्ग और तुमकूरु जिले से आने वाले शिशुओं में विटामिन बी1 की कमी सामने आई। यहां के लोगों का मुख्य आहार चावल है। इन सभी शिशुओं की माताएं कुपोषित थीं। केरल के शिशुओं में इस तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने नहीं आईं। कारण, केरल में पॉलिश्ड राइस (Polished Rice) का इस्तेमाल नहीं होता है। डॉ. रंगनाथ ने बताया कि स्तनपान कराने वाली माताओं को भी छह माह तक अलग से विटामिन बी1 दी जा सकती है।

जेआइसीएसआर (Jayadeva Institute of Cardiovascular Sciences and Research) के निदेशक डॉ. सी. एन. मंजुनाथ (Dr. C. N. Manjunath) ने बताया कि अनाज, दाल, फलिया, रागी, बाजरा, आलू, दूध, बादाम और मांस में विटामिन बी1 प्रचुर मात्रा में मिलता है। लोगों को सही आहार के सेवन के प्रति जागरूक करने में शोध की भूमिका अहम है। इस अध्ययन में सामने आए तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि सरकार को भी गर्भावस्था कार्यक्रमों में विटामिन बी1 से भरपूर खाद्य पदार्थों पर ध्यान देने की जरूरत है।

डॉ. मंजुनाथ के अनुसार हृदय फेल होने के लक्षण वाले जिन शिशुओं के हृदय और फेफड़ों में संरचनात्मक दोष नहीं है उन्हें विटामिन बी1 के पूरक डोज से बचाया जा सकता है। ऐसे मामलों में शिशु मृत्यु दर कम करने में भी मदद मिलेगी।

Nikhil Kumar Reporting
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