केंद्रीय Budget से आस लगाए है Businessman

  • व्यापारियों को GST Slab परिवर्तन की उम्मीद
  • विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने Central finance minister को लिखे पत्र
  • कई बड़े व्यापारियों ने GST से बचने के लिए Branded business किया बंद

योगेश शर्मा
बेंगलूरु. मोदी Government के दोबारा सत्ता में आने के बाद JULY के प्रथम सप्ताह मेंं पेश होने वाले आम budget से Karnataka के व्यापारियों को खासी उम्मीदें हैं। व्यापारियों की मानें तो केन्द्र सरकार व्यापारियों व आमजन को राहत देने के लिए GST के SLAB की संख्या घटाकर दो तक सीमित कर सकती है।
वहीं जीएसटी की दरों में संशोधन कर आमजन को राहत पहुंचाई जा सकती है। इससे पूर्व कर्नाटक के खाद्य पदार्थ व्यापारियों ने केन्द्र सरकार से branded खाद्य पदार्थों पर लगने वाले 5 % GST को खत्म करने की मांग की है। व्यापारियों का मानना है कि कई बड़े व्यापारियों ने GST से बचने के लिए ब्रांडेड व्यापार बंद कर दिया है और गैर Branded का व्यापार कर रहे हैं। इससे जहां सरकार को जीएसटी के रूप में मिलने वाला कर नहीं मिल रहा है, वहीं आमजन को घटिया उत्पाद मिलने से इनकार नहीं किया जा सकता है। Hosiery garment Association ने भी कर्नाटक वेट कानून के आधार पर जीएसटी व ईवे बिल का प्रारूप बनाने का आग्रह किया है। बेंगलूरु थोक खाद्यान्न एवं दलहन व्यापारी संघ के President रमेश चंद लाहोटी की मानें तो घरों में उपयोग होने वाले Branded दाल, चावल व आटा सहित अनेक खाद्य पदार्थों पर 5 % जीएसटी लगा रखा है। इससे अनेक बड़े व्यापारियों ने brand का काम न्यूनतम करते हुए अनब्रांड के क्षेत्र में काम शुरू कर दिया है। इससे जहां सरकार को कर के रूप में मिलने वाले Revenue का नुकसान हो रहा है, वहीं उपभोक्ता को मिल रहे उत्पाद की Quality पर संदेह से इनकार नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार एक देश एक tax की बात कर रही है और मिलावटियों पर नकेल कस रही है। ऐसे में अनब्रांड की आड़ में गुणवत्ताहीन खाद्यान्न बिक्री संभव है। सरकार को इस बजट में ब्रांडेड खाद्य पदार्थों पर लगा 5 % GST हटा देना चाहिए। ताकि consumers को गुणवत्ता परक उत्पाद ही मिल सकें। इससे सरकार को राजस्व के रूप में मिलने वाले कर का नुकसान नहीं होगा अपितु पहले से कहीं ज्यादा राजस्व प्राप्त होगा।


Air conditionerTV पर GST में राहत की उम्मीद

ADISHWAR GROUP के प्रबंध निदेशक पारस भंडारी ने बताया कि केन्द्र सरकार global warming के प्रति खासी चिंतित है। प्रति वर्ष आधा से एक डिग्री Temperature बढऩे से लोगों का घर के बाहर निकलना दूभर हो जाता है। सरकार विलासिता की वस्तु कहे जाने वाले एयर कंडीश्नरों पर जीएसटी में कटौती करने की तैयारी में हैं। उन्होंने उम्मीद जताई की इस बार Air Conditioner पर जीएसटी 28 से घटकर 18 प्रतिशत तक आ सकता है। वहीं 40 इंच तक के LED TV टीवी पर भी GST में राहत मिल सकती है। उन्होंने बताया कि 40 inch तक के LED TV 18% कर दायरे में आ सकते हैं। Bhandari ने कहा कि केन्द्र सरकार domestic electronic products जिन पर अभी 28 प्रतिशत तक जीएसटी है आने वाले समय में 18 प्रतिशत कर दायरे में लाने को प्रयासरत है। ताकि आमजन electronics के उन उत्पादों का इस्तेमाल कर सके।


व्यापारियों को Training दें
Lahoti ने कहा कि जीएसटी से व्यापारी परेशान है। जीएसटी सिस्टम को समझने में और खुद चलाने में परेशानी हो रही है। इसके लिए सरकार को चाहिए के वे कार्यशालाओं के माध्यम से व्यापारियों को प्रशिक्षण दे। उन्होंने GST slab बदलने की उम्मीद जताते हुए कहा कि इससे आमजन को राहत मिलेगी वहीं व्यापारी को अनावश्यक झंझटों से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने छोटे व्यापारियों को ई वे बिल के झंझट से मुक्त करने की मांग की।


जीएसटी घटे तो Industry को बढ़ावा
Trade Activist सज्जनराज मेहता ने कहा कि आमजन को रोटी, कपड़ा और मकान की जरूरत होती है। सरकार रोटी और मकान की आपूर्ति करने की दिशा में प्रयासरत है। लेकिन कपड़े के लिए व्यक्ति को स्वयं ही प्रयास करना होगा। अब कपड़े की जगह गारमेंट ने ले ली है। कृषि के बाद Readymade garment रोजगार उपलब्ध कराने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। इस क्षेत्र में सर्वाधिक महिलाएं हैं कार्यरत हैं। केन्द्र सरकार गारमेंट पर जीएसटी घटाकर 12 से 5 % करती है तो निश्चित रूप से इस व्यवसाय व Industry को बढ़ावा मिलेगा। वहीं सरकार को कर के रूप में पहले से कहीं अधिक राजस्व की प्राप्ति भी होगी। मेहता ने बताया कि केन्द्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर जीएसटी सुगम बनाने और सरलीकरण का आग्रह किया गया है। वहीं ई वे बिल की सीमा 50 हजार से 1 लाख करने की मांग की है।


व्यापारियों पर भरोसा करें
Karnataka Hosiery and Garment Association (खागा) के अध्यक्ष Gautam Chand Porwal ने बताया कि व्यापारी वेट से जीएसटी में आए हैं। वेट कानून Karnataka का था। उसी को आधार बनाकर सरकार ने जीएसटी व ईवेबिल का प्रारूप बनाया जाना चाहिए। ई वे बिल में आ रही परेशानी जैसे वाहन संख्या, Transport ID अधिक गैर जरूरी जानकारी का समावेश को निरस्त किया जाए। व्यापारी वर्ग पर भरोसा किया जाए। जीएसटी Annual return में आ रही परेशानी को व्यापारिक एसोसिएशनों से बात कर सरलीकरण किया जाए। वहीं जुर्माने की दरें जो अभी बहुत अधिक हैं सरकार इसे कम करे। सरकार का पेटा राजस्व से भरता है न कि जुर्माने से।

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Rajendra Vyas Editorial Incharge
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