पारंपरिक रूप से मनाई हाली अमावस्या

पारंपरिक रूप से मनाई हाली अमावस्या

By: Ram Naresh Gautam

Published: 23 Apr 2020, 06:37 PM IST

मैसूरु. राजस्थानी समाज के लोगों की ओर से हाली अमावस्या के उपलक्ष में मारवाड़ की परम्परा को जीवंत रखते हुए बाजरे का खीच, गुड़ व गेहूं के आटे की गलवाणी बना कर खाई गई।

राजस्थान राजपूत समाज के सलाहकार नरपत सिंह दहिया ने बताया कि राजस्थान में किसान वर्ग द्वारा हाली अमावस्या के दिन गुड़, धाणा की मान मनुहार कर, मुंह मीठा करने के बाद अनाज को एक पात्र में रख कर आगामी फसलों की उपज का शगुन देखा जाता है।

इस अवसर पर तालाब से गाद निकाल कर जरूरत के हिसाब से सकोरा बना कर उसमें अलग-अलग प्रकार का अनाज डालकर सकोरे को पानी से पूरा भरा जाता है।

जो सकोरा पहले बिखरता है। शकुन के अनुसार उस फसल की बंपर पैदावार होने का अनुमान लगाया जाता है। इस अवसर पर गणपत सिंह दहिया, भान सिंह दहिया, विजय सिंह, वाग सिंह राठोड़ ,भान सिंह चौहान, महेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।

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