झीलों की सफाई पर बढ़ी तकरार

रासायनिक झाग और गंदगी के कारण उपयोगहीन हो चुकी बेलंदूर और वर्तूर झीलों के पुनरुत्थान के लिए अपनाई जा रही गाद निकास और सफाई व्यवस्था पर विशेषज्ञों और पर्यावरण हितैषी संगठनों ने आपत्ति जताई है।

बेंगलूरु. रासायनिक झाग और गंदगी के कारण उपयोगहीन हो चुकी बेलंदूर और वर्तूर झीलों के पुनरुत्थान के लिए अपनाई जा रही गाद निकास और सफाई व्यवस्था पर विशेषज्ञों और पर्यावरण हितैषी संगठनों ने आपत्ति जताई है।
दोनों झीलों में अप्रसंस्कृत सीवेज बहने का सिलसिला थामे बगैर झील सफाई के नाम गाद निकालने को विशेषज्ञों ने करोड़ों रुपए की बर्बादी कहा है।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने दोनों झीलों के कायाकल्प को लेकर आदेश जारी किया है। इसके तहत झीलों की सफाई सुनिश्चित करने के क्रम में गाद मुक्ति मुख्य है। साथ ही झीलों में मौजूद पानी को पूरी तरह से निकालना भी शामिल है। लेकिन, विशेषज्ञों ने झील सफाई की व्यवहार्यता व उपयोगिता पर सवाल किया है। बेंगलूरु एंवायरोनमेंट ट्रस्ट (बीइटी) की ओर से राज्य के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, बेंगलूरु शहरी जिलाधिकारी सहित एनजीटी की ओर से गठित झील विशेषज्ञ समिति के प्रमुख न्यायाधीश संतोष हेगड़े को लिखे पत्र में झील सफाई की प्रक्रिया को आधा अधूरा बताया है। एक ओर झीलों में अप्रसंस्कृत सीवेज बहाया जा रहा है तो दूसरी ओर झीलों को गादमुक्ति करने का काम भी चल रहा है।

झीलों से हजारों टन गाद निकाला जाना है। ५०० मिलियन टन जहरीला पानी भरा है। झीलों की गाद मुक्ति के बाद उस रसायनिक गाद को कहां गिराया जाएगा यह मूल सवाल है। इसी प्रकार अगर गाद मुक्ति का काम मानसून के पूर्व पूरा नहीं हुआ तो बारिश के दौरान एक बार फिर से झील में गाद मिल जाएगा और सारा काम बेकार हो जाएगा।

अपर्याप्त एसटीपी पर जताई चिंता
झीलों में सीवेज गिराने के पहले उनका प्रसंस्कण करना जरुरी है। लेकिन, जितनी संख्या में सीवेज प्रसंस्करण संयंत्रों (एसटीपी) की स्थापना होनी चाहिए वह नहीं हुई है। यानी अगर झील सफाई और गाद मुक्ति का काम हो भी गया तो फिर से सीवेज ही झीलों में गिरेगा। इससे झील सफाई का काम अधूरा ही साबित होगा।

अन्य जल निकाय होंगे बर्बाद
एक अनुमान के अनुसार बेलंदूर झील और वर्तुर झील से लगभग 500 मिलियन लीटर जहरीले अपशिष्ट जल को डायवर्ट कर उसे बाद में क्षिण पिनाकिनी नदी में छोड़ा जाएगा। जानकारों की मानें तो इतनी बड़ी मात्रा में प्रदूषित जल को सामान्य जल निकायों में छोडऩे से यह उन जल निकायों के पानी को भी उपयोगहीन बना देगा। यह जल अधिनियम की धारा 24 का उल्लंघन है।

Santosh kumar Pandey Desk
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