सत्य देर से ही सही परंतु सामने आता है

अशोकनगर शूले में धर्मसभा

By: Yogesh Sharma

Published: 10 Sep 2020, 08:09 PM IST

बेंगलूरु. अशोकनगर शूले जैन स्थानक में डॉ. समकित मुनि ने लोगस्स पाठ के सूत्रों पर प्रवचन देते हुए कहा प्रार्थना करें-प्रभु, मुझे उत्तम समाधि देना। ऐसी समाधि देना जो बाहर की परिस्थितियों के अनुकूल न होने पर भी परिस्थिति मन की शांति को खत्म न कर पाए। बिना समाधि के धर्म क्रिया हो सकती है परंतु कर्म निर्जरा नहीं होती। प्रत्याख्यान का तभी तक महत्व है जब तक समाधि होती है। कर्म, निर्जरा क्रिया में नहीं समाधि में है। तीर्थंकर परमात्मा सब के गुस्से को हजम कर जाते हैं प्रभु से यह मंगल कामना करें भंते मुझे ऐसी समाधि प्रधान करो जिससे मैं भी अपनों के क्रोध को हजम करना सीखंू। हम कौन सी साधना कर रहे हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि उस साधना में हमारी समाधि कितनी है यह विशेष है। मुनि ने बताया विनय में समाधि लगनी चाहिए। विनय में समाधि तभी घटित होती है जब विनय करने वाला आशीर्वाद के पलों मे भी अपना अहोभाव समझता है और डांट सुनकर भी अपनी खुशनसीबी महसूस करता है। जिस शिष्य को डांट एवं आशीर्वाद दोनों ही वरदान लगते हों उसी को विनय से समाधि लगती है। विनय में जब समाधि नहीं रहती। वह विनय अभिमान का रूप ले लेता है। अभिमान के साथ किया गया विनय कर्म बंद का कारण बनता है।
सती चेलना की कथा सुनाते हुए मुनि ने कहा कपट के द्वारा सत्य को छुपाया जा सकता है। परंतु उसे उजागर होने से रोका नहीं जा सकता। सत्य देर से ही सही परंतु सामने आता है। झूठ को छिपाने की लाख कोशिश कर लेने पर भी वह छिपता नहीं, कभी न कभी वह सामने आता ही है। इस मौके पर मोहनलाल चोपड़ा, देवराज चोपड़ा, इंदरचंद भंसाली, अरविंद कोठारी आदि उपस्थित थे। संचालन संघ के मंत्री मनोहरलाल बम्ब ने किया।

Yogesh Sharma Reporting
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