मंगल भावना समारोह संपन्न

तेरापंथी सभा विजयनगर द्वारा अर्हम भवन में साध्वी मधुस्मिता का मंगल भावना समारोह आयोजित किया गया।

By: शंकर शर्मा

Published: 25 Nov 2018, 10:50 PM IST

बेंगलूरु. तेरापंथी सभा विजयनगर द्वारा अर्हम भवन में साध्वी मधुस्मिता का मंगल भावना समारोह आयोजित किया गया। सभा अध्यक्ष बंशीलाल पितलिया ने स्वागत किया। सभा, महिला मंडल, ज्ञानशाला व कन्या मंडल के सदस्यों ने सामूहिक मंगल भावना गीत की प्रस्तुति दी।


मुख्य अतिथि अभातेयुप अध्यक्ष विमल कटारिया, महासभा के पूर्व अध्यक्ष हीरालाल मालू, तेयुप अध्यक्ष दिनेश मरोठी, महिला मडल उपाध्यक्ष प्रेम भंसाली आदि ने विचारों के माध्यम से मंगल भावना व्यक्त की। संचालन मंत्री कमल तातेड़ ने किया। साध्वी मधुस्मिता ने आशीर्वाद प्रदान किया। दोपहर परदेशी राजा के व्याख्यान के बाद रैली द्वारा विहार के साथ साध्वीवृंद मनोहरलाल बोहरा के निवास पहुंची।


संघ संवाद के प्रतिनिधि जीतेन्द्र घोषल, वसंता देवड़ा, रवि सामरा का जैन पट एवं मोमेंटो द्वारा सम्मान किया गया। आभार उपाध्यक्ष शांतिलाल बाबेल एवं उपासक भंवरलाल मांडोत ने जताया।

एक जगह नहीं रूक सकते साधु-साध्वी
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर स्थित सीआइटीबी परिसर में शनिवार को चातुर्मास पूर्ण एवं कृतज्ञता ज्ञापन दिवस का आयोजन किया गया।


इस अवसर पर श्रुत मुनि ने कहा कि शास्त्रों के नियम के अंतर्गत साधु साध्वी अधिक समय तक एक जगह नहीं रुक सकते। संघ के सहमंत्री भेरूलाल कोठारी, कोषाध्यक्ष प्रकाश पितलिया, भंवरलाल श्रीमाल, चौका अध्यक्ष हगामीलाल भंडारी, भीकम पीपाड़ा, लक्ष्मीलाल सुराणा, अशोक बोहरा, प्रमोद श्रीमाल ने विचार व्यक्त किए। महिला मंडल द्वारा विदाई गीत प्रस्तुत किया गया।


मंत्री दिनेश पीपाड़ा एवं आवास निवास व्यवस्था के अध्यक्ष जनक नंगावत ने गुरु के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। तपस्वियों का अभिनन्दन किया। संघ के अध्यक्ष सम्पत कोठारी ने आभार व्यक्त किया।


समस्त विश्व की मंगल की कामना हमारी विशेषता : रामण्णा
बेंगलूरु. सदियों से हमें पूरे विश्व की मंगल कामना करने के संस्कार मिले है। पूरे विश्व को एक परिवार मान कर हमारे पूर्वजों ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का नारादिया था। ऐसे संस्कार ही हमारे देश की अनूठी पहचान है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता एस. रामण्णा ने यह बात कही।


बसवनगुडी स्थित बीएमएस कॉलेज सभागार में शनिवार को शिशुविहार संस्था की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं के लिए स्वयं के परिवार के भले के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले कई लोग मिलेंगे लेकिन परिवारिक दायित्व निभाने के साथ-साथ जो लोग समाज का चिंतन करते है। समाज के भले के लिए दिन में कुछ समय देते है ऐसे लोग विरले होते है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1942 में अनाथ बच्चों के लिए मां की ममता देने के लिए स्थापित शिशु निवास संगठन गत 75 वर्षों से यह दायित्व निभा रहा है। इस संस्था में कार्यरत लोग बगैर कोई प्रचार-प्रसार अपना दायित्व निभा रहे हैं। समाज के उदारमना दानवीरों के सहयोग से संस्था ने अभी तक 7 हजार से अधिक बच्चों को इस संस्था में अनाथ बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का सिंचन किया है। संस्था की यह सेवा बेमिसाल है।

 

शंकर शर्मा
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