मैसूरु विवि शुरू करेगा इंजीनियरिंग कॉलेज, शिक्षाविदों ने पूछा कहां से आएंगे व्याख्याता

  • अन्य कॉलेजों की हालत भी खस्ता

By: Nikhil Kumar

Published: 18 Sep 2020, 07:08 PM IST

बेंगलूरु. मैसूरु विश्वविद्यालय (यूओएम) इस शैक्षणिक सत्र से इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू करने की तैयारी में है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीइ) को इसके लिए प्रस्ताव भेजना शेष है। लेकिन शिक्षाविदों और कुछ प्रोफेसरों ने यूओएम के इस निर्णय पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यूओएम (University of Mysore) के कुलपति जी. हेमंत कुमार ने बताया कि विवि पहले चामुंडी पहाड़ी की तलहटी में इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए नए भवन का निर्माण करना चाहता था लेकिन विभिन्न कारणों से यह योजना खटाई में पड़ गई। नए भवन का निर्माण अब विवि के मानस गंगोत्री कैंपस में होगा। फंड का इंतेजाम विवि खुद करेगा। भवन के निर्माण सहित शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति संबंधित प्रक्रिया के लिए विवि ने एक विशेष समिति गठित की है। जिसके बाद कॉलेज शुरू करने के लिए एआइसीटीइ को प्रस्ताव भेजेंगे।

कुमार ने बताया कि कॉलेज खुलने से हजारों विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। विवि को चार से पांच करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा, जिसका उपयोग इंजीनियरिंग कॉलेज सहित अन्य विभाग के विकास में होगा।

प्रो. के. आर. निरंजन ने एआइसीटीइ के अनुमोदन के बिना इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू करने पर आपत्ति जताई है। विद्यार्थियों को भविष्य में परेशानी हो सकती है। ऊपर से यूओएम में व्या याताओं की भारी कमी है। कुमार के अनुसार विवि चाहे तो अनुमोदन का इंतेजार किए बिना कक्षाएं शुरू हो सकती हैं लेकिन विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए अनुमोदन के बाद ही कक्षाएं शुरू होंगी।

पहले ही स्टाफ की कमी

यूओएम पहले से ही शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। प्रोफेसरों के 75 फीसदी पद, एसोसिएट प्रोफेसरों के 66 फीसदी पद और सहायक प्रोफेसरों के 46 फीसदी पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है। गैर शैक्षिक कर्मचारियों की भी भारी कमी है। कई कर्मचारी सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वर्ष 2006-07 से स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। अतिथि व्या याता काम चला रहे हैं। प्रशिक्षित व कुशल शिक्षकों की कमी से प्रभावित हो रही है शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

चार गुणा ज्यादा छात्र, व्याख्याता नहीं

प्रदेश के निजी से लेकर सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में व्याख्याताओं की कमी है। बेंगलूरु यूनिवर्सिटी के अंतर्गत संचालित यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरय्या कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की हालत किसी से छिपी नहीं है। यूवीसीइ करीब एक दशक से व्याख्याताओं की कमी से जूझ रहा है। 175 में से 80 पदों पर ही स्थाई व्याख्याताओं की नियुक्ति हो सकी है। शेष बतौर अतिथि व्याख्याता सेवाएं दे रहे हैं। एक संकाय पर 60 छात्रों का अनुपात है जबकि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने एक संकाय पर 15 छात्र निर्धारित किया है। यूवीसीइ को कम-से-कम 39 सहायक प्रोफेसर, 29 एसोसिएट प्रोफेसर और 24 प्रोफेसरों की जरूरत है। विद्यार्थियों को कई स्तरों पर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

Nikhil Kumar Reporting
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