बैंक और क्षेत्रीय कार्यालय में राजभाषा का प्रयोग संतोषजनक

बैंक और क्षेत्रीय कार्यालय में राजभाषा का प्रयोग संतोषजनक

Ram Naresh Gautam | Publish: Sep, 16 2018 07:16:22 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

हिंदी दिवस : विजया बैंक में हुए विविध कार्यक्रम

बेंगलूरु. विजया बैंक के बेंगलूरु दक्षिण क्षेत्रीय कार्यालय ने अपनी स्थानीय शाखा कार्यालयों के साथ शुक्रवार बैंक परिसर में हिन्दी दिवस मनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाप्रबंधक सुदर्शन ने की. सुरेश की प्रार्थना से आरंभ कार्यक्रम में सहायक महाप्रबंधक वसंतराजन ने सभी कार्यपालकों और स्टाफ सदस्यों का स्वागत किया। अपने उद्बोधन में सुदर्शन ने कहा कि हमारे बैंक और क्षेत्रीय कार्यालय में राजभाषा का प्रयोग संतोषजनक है और यह सिलसिला लगातार बना रहे ताकि मंत्रालय और अन्य संस्थानों से पुरस्कारों की प्राप्ति की शृंखला कायम रहे।

उन्होंने कहा कि अगस्त 2018 से सितंबर 2018 के दौरान हमारे क्षेत्र ने हिंदी माह मनाया। अन्य प्रतियोगिताओं के साथ साथ चुनकर बोलिए, हिंदी गीतों की अंत्याक्षरी जैसे विशेष कार्यक्रमों से स्टाफ सदस्यों का उत्साह बढ़ाया गया। उत्तम कार्य निष्पादन करने वाली शाखाओं को राजभाषा शील्ड प्रदान किए गए। कार्यक्रम में पिछले वर्ष के दौरान पूरे क्षेत्र में आयोजित राजभाषा के कार्यक्रमों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर सहायक महाप्रबंधक उत्तम कुमार मिश्रा, सहायक महा प्रबंधक श्रीमती शाजी मोले, अनवर बाशा, मुख्य प्रबंधक श्रीमती मिनी आदि उपस्थित थे। किशोर कुमार वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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ठाणांग सूत्र में चार प्रकार के मानव
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर सीआइटीबी परिसर में श्रुत मुनि ने कहा कि ठाणांग सूत्र में 4 प्रकार के मानव बताए गए हैं। पहला रेत के समान अर्थात वह खुद भी दुखी रहता और दूसरों को भी दुखी करता वह नरक के समान है। दूसरा पत्थर के समान अर्थात ठोकर खाता है, चोट पहुंचाता है और वही पत्थर कलाकार के हाथ में जाता है तो मूर्ति का रूप ले लेता है। तीसरा वृक्ष के समान जो स्वयं कष्ट सहता है लेकिन वृक्ष हमें धूप, छांव, हवा, फल, फूल, औषधि आदि देता है अत: वृक्ष को पर उपकारी की संज्ञा दी गई है।

मानव को जीवन वृक्ष के समान बनाना चाहिए। चौथा हीरे के समान है जो कष्ट सहकर भी शांत रहता है एवं दूसरों को आनंद पहुंचाता है। हीरे को देवरूप की संज्ञा दी गई है हीरा प्रकाश देता एवं अंधकार का नाश करने वाला है। जैन शास्त्रों में साधु-संत गांव को हीरे की उपाधि दी गई है। शनिवार को साध्वी प्रभाकवंर का स्मृति दिवस सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया। मनीष पोरवाड़ एवं उनकी पत्नी वनिता ने सहजोड़े 10 उपवास का प्रत्याख्यान ग्रहण किया।

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