scriptVarious organizations protest against anti-conversion bill | बेंगलूरु में बुधवार को विभिन्न संगठनों ने धर्मांतरण विरोधी विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया | Patrika News

बेंगलूरु में बुधवार को विभिन्न संगठनों ने धर्मांतरण विरोधी विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया

- धर्मांतरण विरोधी विधेयक पर चर्चा आज
- विधानसभा में पारित हुआ तो भी परिषद में पारित करना नहीं होगा आसान

बैंगलोर

Published: December 23, 2021 12:18:40 pm

बेंगलूरु. धर्मांतरण विरोधी विधेयक पर बुधवार को विधानसभा में चर्चा नहीं हो सकी। अब इसे चर्चा एवं पारित कराने के लिए गुरुवार को सदन पटल पर रखा जाएगा। विपक्षी कांग्रेस और जद-एस ने पहले ही विधेयक का विरोध करने की घोषणा की है।

बेंगलूरु में बुधवार को विभिन्न संगठनों ने धर्मांतरण विरोधी विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया

इससे पहले कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार संरक्षण विधेयक 2021 (प्रोटेक्शन ऑफ राइट टू फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल 2021) मंगलवार को ही विधानसभा में पेश किया गया था और उस पर बुधवार को चर्चा का प्रस्ताव था। लेकिन, सभी पक्षों की सहमति से इसे गुरुवार सुबह लाए जाने का फैसला किया गया।

भोजनावकाश के बाद जब सदन की बैठक शुरू हुई तो विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने कार्यवाही के संबंध में विधायकों से सुझाव मांगे। विपक्ष के नेता सिद्धरामय्या तथा विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री जेसी मधुस्वामी सहित सभी नेताओं के साथ मशविरा के बाद विधेयक पर गुरुवार को चर्चा करने का निर्णय किया गया। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी विधेयक के खिलाफ है। इससे पहले कांग्रेस ने इसे संविधान विरोधी भी बताया था।

इस बीच, सूत्रों का कहना है कि अगर संख्या बल के आधार पर सत्तारूढ़ भाजपा विधानसभा में विधेयक पारित कराने में सफल भी हो जाती है तो भी इस कानून के लिए इंतजार करना होगा। क्योंकि, सरकार विधान परिषद में विधेयक संभवत: पारित नहीं करा पाएगी। परिषद में अभी सत्ता पक्ष को बहुमत हासिल नहीं है। हालांकि, कुछ अवसरों और कुछ मुद्दों पर जद-एस के साथ सत्तारूढ़ भाजपा की सहमति बनी है। लेकिन, उसने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह विधेयक का समर्थन नहीं करेगी। बेलगावी में विधानमंडल का सत्र शुक्रवार तक प्रस्तावित है।

अगर सरकार गुरुवार को विधानसभा में विधेयक पारित कराने में सफल होती है तो संभवत: अंतिम दिन परिषद में विधेयक रखा जा सकता है। हालांकि, 5 जनवरी के बाद परिषद के 25 सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के बाद भाजपा बहुमत के करीब होगी और निर्दलियों की मदद से इसे पारित कराने की स्थिति में होगी।

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