नए साल में बदलना होगा वाहन नम्बर प्लेट

नए साल पर वाहनों का नम्बर प्लेट भी नया हो जाएगा लेकिन उच्च सुरक्षित पंजीकृत प्लेट (एचएसआरपी) की व्यवहार्य स्थिति को लेकर न सिर्फ आम नागरिक बल्कि राज्य परिवहन विभाग के अधिकारी भी भ्रमित हैं।

By: Ram Naresh Gautam

Published: 30 Dec 2018, 06:20 PM IST

बेंगलूरु. नए साल पर वाहनों का नम्बर प्लेट भी नया हो जाएगा लेकिन उच्च सुरक्षित पंजीकृत प्लेट (एचएसआरपी) की व्यवहार्य स्थिति को लेकर न सिर्फ आम नागरिक बल्कि राज्य परिवहन विभाग के अधिकारी भी भ्रमित हैं।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम में संशोधन करते हुए एक अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत सभी वाहन निर्माताओं द्वारा १ अप्रैल 2019 से बेचे जाने वाले वाहनों पर एचएसआरपी स्थापित करना होगा। अधिसूचना के एक हिस्से में यह भी कहा गया है कि न सिर्फ नए वाहनों के लिए बल्कि मौजूदा वाहनों का नम्बर प्लेट भी एचएसआरपी में बदला जाना चाहिए।
परिवहन विभाग का कहना है कि नया नियम लागू करना हमारे लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। १ अप्रैल के बाद से बेचे जाने वाले नए वाहनों में तो अनिवार्य रूप से एचएसआरपी लगाया जा सकता है, लेकिन असली चुनौती पुराने वाहनों को लेकर है। बेेंगलूरु सहित पूरे राज्य में वाहनों की संख्या करोड़ों में है। वहीं उस अनुपात में एचएसआरपी बनाने की व्यवस्था मौजूद नहीं है। परिवहन विभाग इसी को लेकर भ्रम की स्थिति में है, आखिर निर्धारित समय के भीतर कैसे सभी वाहनों का मौजूदा नम्बर प्लेट एचएसआरपी में परिवर्तित किया जाएगा।

एचएसआरपी कैसे काम करेगा
एचएसआरपी में सुरक्षा सुविधाओं की गारंटी है, यानी वाहन पर लगा नम्बर प्लेट नकली नहीं हो सकता है। इसमें एक क्रोमियम-आधारित होलोग्राम को प्लेट के दोनों तरफ विशेष तकनीक द्वारा लगाया जाता है। पंजीकरण प्लेट के नीचे बाईं ओर कम से कम 10 अंकों के साथ एक स्थायी पहचान संख्या की एक लेजर ब्रांडिंग होती है। इसके अतिरिक्त एक क्रोमियम-आधारित होलोग्राम स्टिकर को विंडशील्ड के अंदरूनी हिस्से पर पंजीकरण प्राधिकरण, पंजीकरण संख्या, इंजन नंबर और चेसिस नंबर के विवरण के साथ भी लगाया जाता है। इससे नम्बर प्लेट को स्कैन करने मात्र से ही वाहन का पूरा विवरण आ जाता है।

अपराध नियंत्रण में सहायक
अत्याधुनिक तकनीक वाला एचएसआपी अपराध नियंत्रण और यातायात नियम उल्लंघन पर रोक लगाने में सहायक होता है। मौजूदा समय में कई प्रकार के अपराध या नियम उल्लंघन के मामलों में अगर वाहन का नम्बर नोट किया जाता है तो जांच में वह फर्जी निकलता है। इससे आरोपी को पकड़ पाना मुश्किल हो जाता है। वहीं एचएसआरपी आधारित वाहनों का नम्बर प्लेट हर प्रकार की जानकारी देने में सक्षम होगा। इससे पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में आसानी होगी। साथ ही चोरी के वाहनों में चलने वालों की भी पहचान हो सकेगी।

शीर्ष अदालत ने २०१२ में किया था अनिवार्य
वाहन सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए वर्ष 2005 में एचएसआरपी को लागू किया गया था, जिसे वर्ष २०१२ में सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य कर दिया था। कोर्ट ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को छह महीने के भीतर सभी वाहनों को एचएसआरपी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। हालांकि इसमें विलंब होता गया और अब केन्द्रीय राजमार्ग एवं परिवहन मंत्रालय ने १ अप्रैल २०१९ तक इसे अनिवार्य करने की अधिसूचना जारी की है।

Ram Naresh Gautam
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