उपराष्ट्रपति नायडू का सुझाव, छह महीने खेतों में काम करें कृषि के विद्यार्थी

उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू ने शुक्रवार को सुझाव दिया कि कृषि के बारे में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को कम से कम छह महीने तक

By: शंकर शर्मा

Published: 20 Jan 2018, 09:33 PM IST

बेंगलूूरु. उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू ने शुक्रवार को सुझाव दिया कि कृषि के बारे में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को कम से कम छह महीने तक खेतों में काम कर व्यवहारिक ज्ञान हासिल करना चाहिए। शहर के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन संस्थान के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय कृषि की चुनौतियां और संभावनाओं पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा कि व्यवहारिक ज्ञान पर बल देेते हुए कहा कि हमें एक बार फिर से महात्मा गांधी के दिखाई राह का अनुकरण करना होगा। हमें गांवों की ओर लौटना होगा, हम गांव को पीठ नहीं दिखा सकते।

नायडू ने कहा कृषि कम और अनिश्चित आय के कारण आकर्षक पेशा नहीं रह गया। देश की खाद्य सुरक्षा के लिए इस स्थिति को बदलना आवश्यक है। नायडू ने कृषि क्षेेत्र में सुधार व इसे रणनीतिक दिशा में ले जाने के लिए निजी व सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश को जोडऩे की दीर्घावधि व मध्यावधि योजना बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है।
नायडू ने कहा कि भारत में कृषि बहुत पहले से ही निजी क्षेेत्र के निवेश पर निर्भर रही है और सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान कुल निवेश का मात्र 15 फीसदी से भी कम रहा है और शेष सारा निवेश किसान ही किया करते हैं।


कृषि क्षेत्र को निजी व सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों से अधिक निवेश की जरुरत है। इस क्षेत्र में कृषि इनपुट,सिंचाई, विपणन, कटाई के बाद प्रबंधन, जोखिम प्रबंधन, भूमि व संस्थागत विकास जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेेत्र के अधिक निवेश की नीतियां बनाए जाने की जरुरत है। इस तरह के प्रयास करने पर ही 2013 तक किसानों की आय को दुगुना करने के सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।


उपराष्ट्रपति ने उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को पर्याप्त लाभ दिलाने की दिशा में 12 सूत्रीय पहल किए जाने को कहा। इसमें करीब 20 फीसदी उत्पादकता बढ़ाने के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध करवाना,उ र्वरकों का संतुलित इस्तेमाल, समय पर संस्थागत ऋण सुलभ करवाना, लघु व सीमांत किसानों को नवीकृत तौर तरीके अपनाने के लिए सहायता प्रदान करने प्रावधान करना शामिल हैं। नायडू ने कृषि में मशीनीकरण को बढ़ाने, कृषि को किसानों की आय की पूरक बनाने के लिए विवधितामय बनाने का भी सुझाव दिया।


उन्होंने कहा कि कृषि में भविष्य की अधिकतर बढ़त गैर फसली क्षेेत्र से होगी लिहाजा बागवानी, डेयरी,पशुपालन,मत्स्य जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की जरुरत है। उन्होंने भूमि सुधारों को लागू किए जाने का सुझाव देते हुए कहा कि अनेक राज्यों में अनुपस्थित रहने वाली जमींदारी प्रता के कारण विशाल भू- भाग गैर उत्पादित पड़े है। उन्होंने अनुबंध कृषि को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

शंकर शर्मा
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