तप,ध्यान करने से बढ़ता है पुण्य-आचार्य महेन्द्रसागर

पंचागुली माता का विशिष्ट पूजा विधान हुआ

By: Yogesh Sharma

Published: 14 Oct 2021, 10:03 AM IST

बेंगलूरु. महावीर स्वामी जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ त्यागराज नगर में आचार्य महेंद्रसागर सूरी ने बुधवार को शाश्वती नवपद आयंबिल ओली के दूसरे दिन प्रवचन में कहा कि यह वर्षा ऋतु जाने का और शीत ऋतु आने का समय है। इसे ऋतुओं का संधि काल कहा जाता है। इन दिनों में मौसमी बीमारियों के बचाव के लिए जीवन शैली में कुछ जरूरी बदलाव करना चाहिए। ऋतु परिवर्तन के समय में स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए और ध्यान करने का विशेष महत्व है। ज्ञानियों के कहे अनुसार इन दिनों में तप, ध्यान करने से पुण्य में बढ़ोतरी होती है। साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है। नवपद आयंबिल ओली में रोज सुबह उठकर सामायिक, प्रतिक्रमण और ध्यान करना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मकता बढ़ती है और बुरे विचार दूर होते हैं। सुबह-सुबह किए गए धर्म क्रिाकलाप से दिन भर के कामों में ऊर्जा और उत्साह बना रहता है। आलस दूर रहता है ऐसा करने से शरीर को स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। नवपद ओली की आराधना से आराधक के सभी पाप धुल जाते हैं और नवपद का उपासक सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है। बुधवार को यहां अष्टमी के दिन विहरमान तीर्थंकर सीमंधार स्वामी की अधिष्ठायिका पंचागुली माता का विशिष्ट पूजा विधान भी हुआ। इस विधान में नगर के अनेक जाने-माने लोग शामिल हुए। यह विधान आचार्य महेंद्र सागर सूरी, मुनि राज पद्मासागर, मुनि मेरु पद्मासागर और मुनि अर्हम पद्मसागर की निश्रा में हुआ। यहां उपस्थित सैकड़ों की संख्या में श्रावकों ने हवन में आहूतियां दीं।

Yogesh Sharma Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned