विवेक तो जीवन के हर मोड़ पर जरूरी-डॉ. महाप्रज्ञा

धर्मसभा

By: Yogesh Sharma

Published: 18 Sep 2020, 10:25 AM IST

बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टनम के दिवाकर मिश्री गुरु राज दरबार में साध्वी डॉ. कुमुदलता आदि ठाणा का चातुर्मास जारी है। गुरुवार को आयोजित धर्मसभा में साध्वी डॉ. महाप्रज्ञा ने कहा कि हेय ज्ञेय उपादेय इन तीन भागों में जगत की वस्तु, इन्सान और कार्य विभक्त हुए हैं। किंतु इस तथ्य को सही ढंग से समझने वाले, उसके अनुरूप आचरण करने वाले कोई विरले महान विभूति ही होती हैं। वैसे भी विवेक तो जीवन के हर मोड़ पर जरूरी है। अविवेकी एवं असहिष्णुता ये दोनों तत्व जीवन की शांति को नष्ट करते हैं। कार्य अकार्य का विवेक, मन वचन एवं काया की सहिष्णुता हो तो ही जीवन में आनंद, शान्ति एवं प्रसन्नता प्राप्त होती है। इन सब बातों का विचार मननशील व्यक्ति ही कर सकता है। इसलिए विश्व में सभी धर्मों ने मानवभव की महत्ता को समझाया है। किन्तु मानव जीवन मिलने के बाद भी अंतर आत्महित करने का पुरुषार्थ जागृत न हो तो मानवभव भी निष्फल होता है। क्षुधा शान्ति के लिए भोजन आवश्यक है। तृषा तृप्ती के लिए पानी जरूरी है। सामग्री खरीदने के लिए धन जरूरी है। तंदुरुस्ती के लिए औषध सेवन जरूरी है। सुख प्राप्ति के लिए हित कार्य करना जरूरी है ये किसी मानव की समझ में कभी नहीं आता। जीवन के साथ मन में उठने वाली सभी इच्छाएं मनुष्य के लिए ढाल की गरज सार रही हैं। जैसे ढाल पानी के नीचे उतार देता है वैसे ही सभी इच्छाएं इंसान को निम्न कोटि में ले जा रही हैं। नीचे उतार रही हैं मतलब, लाचार बना रही हंै। दीन बना रही हैं एवं नि:सत्व बना रही है। इच्छा थी संपत्ति को पाने की पर पुण्य कम है।मन सतत दीनता का अनुभव कर रहा है। समिति के विनोद दरला ने बताया कि गुरुवार के अनुष्ठान के लाभार्थी कालूराम,अशोक, विमल रांका बेंगलूरु,भंवरलाल, मांगीलाल सेठिया श्रीरंगपट्टनम, देवराज, जंबूकुमार, प्रसन्नकुमार, श्रेणिककुमार मूथा मैसूर वाले रहे।

Yogesh Sharma Reporting
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