शहर के बड़े नालों को मरम्मत का इंतजार

शहर के बड़े नालों को मरम्मत का इंतजार

Ram Naresh Gautam | Publish: Oct, 06 2018 07:48:11 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

थोड़ी सी बारिश के बाद बन जाते हैं बाढ़ जैसे हालात

नालों की मरम्मत और रखरखाव के लिए जारी राशि अपर्याप्त

बेंगलूरु. बारिश के दौरान शहर में पानी निकलने के सही इंतजाम नहीं होने के कारण जरा सी बारिश के कारण ही हालात बेहद खराब हो जाते हैं। बरसाती नाले समय से सफाई नहीं होने के कारण पट चुके हैं और बारिश का पानी नहीं निकल पाता। बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक शहर में 633 बड़े बरसाती नाले (राज कालुवे) शामिल हैं, जिनकी लंबाई 842 किलोमीटर है। वर्ष 2017-18 में इन नालों के रखरखाव पर 1225 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसके तहत नालों में भरी गंदगी निकालना तथा उनमें कोई कचरा न फेंके इसलिए फेंसिग लगाना शामिल है। इस योजना के अंतर्गत शहर के कई बड़े नालों का उन्नयन किया गया है।


बारिश के पश्चात शहर के एचएसआर ले-आउट,शांतिनगर डबल रोड, डॉलर्स कॉलोनी, उत्तर हल्ली, बागलकुंटे, बाणसवाडी, हेण्णूर, हेब्बाल, कोटिगेपाल्या, सिल्क बोर्ड जंक्शन, सर्जापुर रोड, होसूर रोड, बन्नेेरघट्टा रोड, शिवानंद चौराहा अंडरब्रिज, ओकलीपुरम चौराहा, येलचन हल्ली, यशवंतपुर रेलवे स्टेशन, आरएमसी यार्ड, पैलेस गुट्टहल्ली, मडिवाला, बीटीएम ले आउट, थणींसंद्रा, नागवारा रिंग रोड, जीवनबीमा नगर, कॉटनपेट, सुल्तानपेट, शिवाजीनगर, चिकपेट ओटीसी रोड, के.आर.मार्केट, बंबू बाजार, आंजनापुर, हुलीमावू, गोट्टीगेरे, गोल्लरहट्टी, हारोहल्ली, पीनिया इंडस्ट्रियल क्षेत्र, वी. नारायणपुर, कृष्णराजपुरम, देवसंद्र, देवरजीवनहल्ली, हलसूरु, ईजीपुर, कोरमंगला जैसे क्षेत्रों में एक-दो घंटे की बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात दिखते हैं।

गांधीनगर क्षेत्र में नालों की मरम्मत अधूरी है। यहां के कई बड़े नालों पर किए गए अतिक्रमण के मामलों की अदालतों ने सुनवाई चलने से नालों की मरम्मत तथा रखरखाव नहीं हो रहा है। शांतिनगर क्षेत्र के टीटीएमसी के निकट स्थित बड़े नाले की मरम्मत नहीं होने से नाले का पानी डबल रोड पर फैल जाता है।


यहां आने से कतराते हैं उपभोक्ता
शहर का प्रमुख व्यापारी केंद्र चिकपेट, नगरथपेट तथा कॉटनपेट में ऐसे हालात रहते हैं कि बारिश के दिनों में उपभोक्ता वहां जाने से कतराते हैं। चिकपेट के मामूलपेट, सुल्तानपेट जैसे क्षेत्रों में बारिश के दौरान पानी सड़कों पर फैल जाता है। यहां के कई भवनों के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित दुकानों में बारिश का पानी घुस रहा है। जिसके कारण व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा है। सड़कों की मरम्मत, पाइप लाइन बिछाने के लिए सड़कें खोदी जाती हैं लेकिन मलबा काफी दिनों तक सड़कों पर पड़ा रहने से बारिश के दिनों में यहां की दुकानों में जाना भी असंभव हो जाता है।

 

नालों से गंदगी नहीं निकालना भी समस्या
बन्नेरघट्टा रोड के बिलकेहल्ली वार्ड में बड़े नाले में कचरा और गंदगी भरी होने से बदबू फैल रही है। स्थानीय निवासियों की शिकायत है कि यहां के बहुमंजिले अपार्टमेंट्स की सीवर लाइन बड़े नाले में छोड़ी गई है। कई बार शिकायत के बावजूद बीबीएमपी तथा बीडब्लूएसएसबी ने कोई कार्रवाई नहीं की है। इसके अलावा इस बड़े नाले के आस-पास ही कचरा डंप किए जाने से बारिश के दौरान यह कचरा बड़े नाले में समा रहा है।

कुरुबरहल्ली वार्ड में गत 5 वर्षों से बड़े नाले को जोडऩे वाली छोटी नालों की मरम्मत नहीं किए जाने से छोटे नाले गाद तथा कचरे से भर गए है। जिसके कारण बारिश होते ही पानी नालों के बदले सड़कों पर बहने लगता है। यह पानी यहां के मकानों में घुस रहा है।बोम्मनहल्ली विधानसभा क्षेत्र के श्रंृगेरी नगर वार्ड में वर्ष 2016 में साफ किए गए बड़े नाले में फिर गाद भर गई है। इस नाले में पेड़-पौधे भी बढ़ गए है। जिसके कारण इस नाले का पानी सड़कों पर फैल रहा है। जिसके कारण सड़के भी क्षतिग्रस्त हो रही है। सीवर लाइन का पानी बडे नालों में समा जाने के कारण शहर की तालाबों में बड़े नालों को प्रदूषित पानी पहुंच रहा है।


बड़े नालों पर अतिक्रमण
पालिका आयुक्त मंजुनाथ प्रसाद के मुताबिक बड़े नालों पर अतिक्रमण ही इस समस्या की जड़ है। इस समस्या के समाधान के लिए गत 10 वर्षों से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर ऐसे अतिक्रमण भी हटाए गए हैं लेकिन यह काम अभी पूरा नहीं हुआ है। इसके समाधान के लिए बीबीएमपी, कर्नाटक झील विकास निगम, वन विभाग, बीडब्लूएसएसबी तथा बीडीए प्रयास कर रहे हैं। शहर में 842 किलोमीटर लंबे बड़े नालों की मरम्मत के लिए अधिक धन की दरकार है। अभी केवल मुख्यमंत्री के नगरोत्थान कार्यक्रम के अंतर्गत यह कार्य किया जा रहा है।

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