पानी की कमी नहीं, बर्बादी है असली समस्या : गडकरी

पानी की कमी नहीं, बर्बादी है असली समस्या : गडकरी

Sanjay Kumar Kareer | Publish: Mar, 24 2018 11:06:42 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

दक्षिण भारत का जल संकट दूर करने के लिए रोकी जाएगी अधिशेष जल की बर्बादी

बेंगलूरु. केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को कहा कि देश में पानी की कमी नहीं बल्कि पानी की बर्बादी सबसे बड़ी समस्या है। हिमालय की नदियों और गोदावरी जैसी नदियों का आधे से ज्यादा पानी समुद्र में बहकर बर्बाद हो जाता है। सीआइआइ इंडस्ट्री नेक्स्ट सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने 99 सिंचाई परियोजनाएं शुरू की हैं और उनके शीघ्र निष्पादन को सुनिश्चित किया जाएगा ताकि नदी का जल उच्चतम सीमा तक बढ़ाया जा सके।

उन्होंने कहा कि उद्योगों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए सिर्फ पानी चाहिए जबकि कृषि क्षेत्र को पानी और बिजली दोनों की जरूरत है। केंद्र की एक महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि गोदावरी नदी का करीब 3000 टीएमसी फीट पानी समुद्र में बह जाता है इसमें महाराष्ट्र में बहने वाली इंद्रावती नदी का अधिशेष जल भी शामिल है। इसलिए केंद्र सरकार ने अधिशेष जल को कालेश्वरम बांध में संग्रहित कर वहां से दो अन्य बांधों में मोडऩे की योजना बनाई है जिसे अंतिम चरण में बाद में पाइपलाइन के माध्यम से कावेरी नदी से जोड़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि आंध्रप्रदेश स्थित पोलावरम बांध के पानी को कृष्णा नदी से जोड़ा जाएगा और उसे बाद में कावेरी नदी से पहुुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के सफलीभूत होने से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु का जल संकट दूर होगा और राज्यों के बीच कोई विवाद नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि गोदावरी का लगभग 3000 टीएमसी फीट पानी समुद्र में बह जाता है। ऐसे में अगर 1000 टीएमसी फीट पानी को भी जलसंकट से जूझते प्रदेशों में स्थानांतरित किया जा सके तो तो उन क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक बदलाव लाया जा सकता है। गोदावरी में पोलावरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना पर उन्होंने कहा कि इस परियोजना में सिर्फ 140 टीएमसी फीट पानी का उपयोग करने की परिकल्पना की गई है लेकिन इसके लाभ से 10,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खाद्यान उत्पादन और अन्य लाभ होगा। ऐसी परियोजनाएं किसानों की आय में वृद्धि करने में मदद कर सकती हैं और अगर ग्रामीण आबादी की आमदनी बढेगी तो उद्योग जगत प्रगति करेगा।

सड़क परियोजनाओं में भारतीय ठेकेदारों को प्राथमिकता

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के लिए अन्य शीर्ष प्राथमिकता वाले क्षेत्र में सड़क परियोजनाएं हैं और हमने भारतीय ठेकेदारों को अधिकतम सड़क परियोजनाएं प्रदान करने का निर्णय लिया था जो हमेशा सभी स्तरों में स्थानीय आबादी को रोजगार देते हैं। ऑटोमोबाइल उद्योग में मदद करने के लिए उन्होंने कहा कि सरकार बड़े पैमाने पर ऑटोमोबाइल स्क्रैप की अनुमति देने और इसे रीसाइकिलिंग करने की योजना बना रही है ताकि स्क्रैप के स्टील, एल्यूमीनियम, तांबे, रबर और प्लास्टिक का इस्तेमाल कर ऑटोमोबाइल उद्योग लाभ अर्जित कर सके।

कारवार में प्रमुख बंदरगाह बनाने की योजना

परिवहन क्षेत्र में नौवहन को प्रमुखता देने के मकसद से केन्द्र सरकार देश में 60 नदी बंदरगाहों का निर्माण करा रही हैऔर समुद्र क्षेत्र में भी प्रमुख बंदरगाहों को विकसित करने की योजना है। उन्होंने कहा, हम कर्नाटक के कारवार में एक प्रमुख बंदरगाह बनाना चाहते हैं। इसके लिए राज्य सरकार की अनुमति और भूमि आवंटन की प्रतीक्षा है ताकि परियोजना शुरू की जा सके।

उन्होंने कहा कि अंतर्देशीय जलमार्ग अर्थव्यवस्था में भारी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं क्योंकि सड़क परिवहन की तुलना में इसमें सिर्फ दसवें हिस्से का खर्च आता है। उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन में अगर दस रुपए खर्च होता है तो रेल परिवहन में सात रुपए जबकि अंतर्देशीय नौवहन में सिर्फ एक रुपए का खर्च आता है।

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