शेर के समान चेहरे वाले लंगूर संकट में

शेर के समान चेहरे वाले लंगूर संकट में

Shankar Sharma | Publish: Dec, 08 2017 09:59:02 AM (IST) Bangalore, Karnataka, India

उत्तर कन्नड़ जिले में अघनाशिनी घाटी की पहचान माने जाने वाले शेरनुमा चेहरे के लंगूर अपने पारम्परिक प्रवास के खोने का खतरा झेल रहे हैं

बेंगलूरु. उत्तर कन्नड़ जिले में अघनाशिनी घाटी की पहचान माने जाने वाले शेरनुमा चेहरे के लंगूर अपने पारम्परिक प्रवास के खोने का खतरा झेल रहे हैं। बेशक, इस वन क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया गया है, लेकिन वन विभाग पर यहां सडक़ निर्माण को स्वीकृति देने का दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यहां सडक़ों का जाल बिछाया जाता है तो विशेष शारीरिक संरचना वाले लंगूर को अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।


प्रदेश सरकार ने २०११ में अघनाशिनी घाटी के २९ हजार हेक्टेयर वन भूमिक को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था। माना जाता है कि यहां करीब ६२० शेरनुमा चेहरे वाले लंगूर हैं, यह संख्या विश्व के किसी एक क्षेत्र में सर्वाधिक है। अंतरराष्ट्रीय संरक्षण नेटवर्क संघ द्वारा लुप्तप्राय प्रजातियों में सूचीबद्ध इन लंगूरों के लिए यहां के मानवीय गतिविधि रहित सदाबहार जंगल मुफीद आवास है।


समस्या तब शुरू हुई जब लोक निर्माण विभाग ने इस संरक्षित वन क्षेत्र से होकर प्रस्तावित दो राज्य राजमार्गेां के निर्माण के लिए बहुप्रतीक्षित स्वीकृति के बारे में वन विभाग से पूछा।


इन योजनाओं का पेंच
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार होन्नावर तालुक में दो सडक़ों के निर्माण की योजना है। जिसमें एक सलकोड से दोड्डमाने तक करीब ४० किलोमीटर और दूसरा मत्तिनगड्डे से मलगल्लू तक करीब १२ किलोमीटर दूरी तक बनाया जाना है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि सडक़ निर्माण की आवश्यकता सिर्फ निहित स्वार्थ पूरा करने के लिए स्थानीय नेताओं और लकड़ी माफिया को है।


निर्माण के विरोध में उठे स्वर
सडक़ निर्माण के लिए वन विभाग पर बन रहे दबाव के विरोध में आवाज उठने लगी है। वन्य जीव संरक्षण के लिए काम करने वाले के संतोष कहते हैं कि उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस संरक्षित क्षेत्र में किसी तरह के निर्माण को स्वीकृति न देने का अनुरोध है। यदि प्रस्तावित रूट पर सडक़ बनाई जाती हैं तो कम से कम डेढ़ सौ लंगूरों को खत्म करने की तैयारी कर दी जाएगी।

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