धर्म में पुरुषार्थ करेंगे तभी आत्मकल्याण हो पाएगा

आचार्य चन्द्रयश सूरिश्वर ने किया धर्मसभा को सम्बोधित

बेंगलूरु. सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम में उपधान तप आराधना में मंगलवार को आचार्य चंद्रयश सूरिश्वर ने कहा कि वर्तमान में मनुष्य धर्म से ज्यादा धन के पीछे भागता है, जितना पुरुषार्थ धन कमाने के लिए वह करता है, उससे आधा भी पुरुषार्थ धर्म के पीछे नहीं करता है। पंचम काल में मनुष्य जन्म की प्राप्ति और उसमे भी जैन धर्म की प्राप्ति होना परम पुण्योदय की बात है। यह परम पुण्योदय को सफल करना हमारा परम कर्तव्य है। परमात्मा की वाणी पर श्रद्धा पैदा करके धर्म में पुरुषार्थ करेंगे तभी आत्मकल्याण हो पाएगा। उन्होंने कहा जैसा चाहिए वैसा अभी तक हमें धर्म के प्रति अनुराग और अहोभाव पैदा नहीं हुआ है। धन रत्न समान लगता है और धर्म जब धर्म रत्न समान लगेगा तब धर्म में पुरुषार्थ करने की प्रेरणा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी सुख पाने हम धन के पीछे भागते हैं। परन्तु हम भूल रहे हैं की धन से क्षणिक सुख प्राप्त हो सकता है अगर शाश्वत सुख चाहिए तो धर्म की शरण में ही जाना होगा धनवान तो सब है परन्तु सब सुखी नहीं होते परन्तु धर्मी व्यक्ति धनवान होगा या नहीं भी परन्तु मन से तो अवश्य सुखी और समृद्ध होगा।

Yogesh Sharma
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