नारी मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत-साध्वी सुमित्रा

धर्मसभा का आयोजन

By: Yogesh Sharma

Published: 10 Sep 2021, 08:01 AM IST

बेंगलूरु. राजाजीनगर जैन स्थानक में विराजित साध्वी सुमित्रा के सान्निध्य में साध्वी डॉ. सुप्रिया ने पर्युषण महापर्व के छठे दिन अंतगडसूत्र का विवेचन करते हुआ कहा कि यह शास्त्र हमारे जीवन को अनुशासित करने वाला पवित्र शास्त्र है। जिसके श्रवण करने से आत्मा की विशुद्धि होती है। परमात्मा की वाणी श्रवण मात्र से अनेक पुरुषों के जीवन का उद्धार हुआ है। परमात्मा ने हमें इस सूत्र के माध्यम से कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ साधन बताया है। क्रोध के आवेश में आकर किस तरह अर्जुन माली प्रतिदिन 6 पुरुष और एक महिला की हत्या करता है। राजगृहनगरी में अर्जुनमाली के विनाशकारी प्रकोप से सारे लोग भयभीत होने लगते हैं। सुदर्शन सेठ दृढ़ता के साथ अ_ारह पापों का सर्वत्र त्याग कर, निर्भिकता से चारों आहारों का त्याग कर संथारा ग्रहण कर, अरिहंतो एवं सिद्धों की स्तुति स्मरण करने लगता है। अर्जुन माली सुदृढ़ साधक सुदर्शन सेठ का बाल भी बांका नहीं कर सकता है। सुदर्शन सेठ की देव गुरु धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा अर्जुनमाली के जीवन को परिवर्तित कर देती है। अर्जुनमाली प्रभु वाणी श्रवण कर, संयम धारण कर, आक्रोश आदि परिषहों को, यातनाओं को समभाव से सहन करता है। कर्म निर्जरा के उत्कृष्ट भाव से अर्जुन अणगार उपसर्गों को समतापूर्वक सहन करते है।
‘नारी तू बड़ी महान है’ विषय पर प्रवचन में साध्वी ने कहा कि भारतीय संस्कृति को गौरवान्वित करने में नारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। नारी मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत है। उसके बिना पुरुष का जीवन अपूर्ण है। पुरुष के नीरस जीवन को सरस बनाने का कार्य नारी करती है। पुरुष के उजड़े हुए उपवन को नारी पल्लवित बनाती है। त्याग उसका स्वभाव है और सहनशीलता उसका व्रत है। जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता निवास करते है। नारी को समाज में वही प्रतिष्ठा देनी चाहिए जो हमें महापुरुषों ने बताया है। नारी को शिक्षित, स्वावलंबी, सुसंस्कृत और योग्य बनाएँगे तभी नारी हमारे विकास में सहायक बन सकेगी। साध्वी सुदीप्ति ने अंतगड़ सूत्र का वांचन किया। साध्वी सुविधि ने स्तवन की प्रस्तुति दी। साध्वी सुमित्रा ने अनेक तपस्वियों को प्रत्याख्यान व सभी श्रद्धालुओं को मंगल पाठ प्रदान किया। नेमीचंद दलाल ने बताया कि बहुमंडल की सदस्याओं द्वारा भगवान अरिष्टनेमी राजुलमति की नाटिका की प्रस्तुति दी गई। शिव जन्मोत्सव का चार दिवसीय आयोजन 16 सितम्बर से शुरू होगा।

Yogesh Sharma Reporting
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