जीतो समिट को सफल बनाने में जुटी महिलाएं

जीतो समिट को सफल बनाने में जुटी महिलाएं

Ram Naresh Gautam | Publish: May, 17 2018 07:30:26 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

बैठक में 75 संस्थाओं से 300 महिलाओं ने हिस्सा लिया

बेंगलूरु. जीतो महिला विंग की ओर से जैन समाज के सभी संस्थाओं के पदाधिकारियों की बैठक बुधवार को संभवनाथ भवन वीवीपुरम में हुई। बैठक में 75 संस्थाओं से 300 महिलाओं ने हिस्सा लिया। जीतो लेडीज विंग की ललिता गुलेच्छा, मधु दोषी, प्रमिला भंडारी, सरिता खिवेंसरा, पिंकी जैन, किरण लूनिया, सोनल बाफना, अनिता पिरगल, पिंकी जैन आदि ने उन्होंने बताया कि जीतो ग्रोथ समिट के प्लेटफार्म से जुड़कर महिलाएं समाज में सेवा, शिक्षा, सुरक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण में योगदान दे सकती हंै।जीतो मीडिया संयोजक सज्जन राज मेहता ने बताया कि चेयरमैन ने जीतो द्वारा आगामी आयोज्य तीन दिवसीय जीतो ग्रोथ समिट की सम्पूर्ण जानकारी दी। धन्यवाद अनिता पिरगल ने दिया।

 

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कर्म और पुरुषार्थ अच्छे हों
बेंगलूरु. वर्धमान सथानकवासी जैन संघ चिकपेट की ओर से प्लेटिनियम सिटी में आयोजित प्रवचन में श्रमण संघीय उपाध्याय रविन्द्र मुनि ने मानव जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कर्म और पुरुषार्थ अच्छे होने चाहिए। दुर्लभ मानव जीवन के कीमत को समझना चाहिए और उसका सदुपयोग करना चाहिए। मुनि ने कहा कि जीवन में धर्म और समाज मानसिक शांति के लिए जरूरी है।

योगक्षेम भारतीय संस्कृति का बहुमूल्य शब्द है। इस शब्द की कीमत को जीवन में अंगीकार करें, इस मार्ग पर बढऩे का प्रयत्न करें। रमणीक मुनि ने कहा कि पुण्य के प्रभाव से व्यक्ति को संतों के दर्शन और सत्संग का लाभ मिलता है। ऋषि मुनि ने कहा कि साधु का जीवन सृष्टि का संगीत होता है। प्रेम, सौहार्द, सज्जनता का भाव मनुष्य को परमात्मा से जोड़ता है। कार्यक्रम में निर्मल चोरडिया ने भी विचार व्यक्त किए। मौके पर प्रकाश बंब, गौतमचंद धारीवाल, मनोहर बाफना, पीरचंद ओसवाल, शकुंतला जैन, विकास जैन, विशाल जैन, आनंद फूलफगार आदि मौजूद रहे। संचालन रमेश बोहरा ने किया।

 

टूट रही हैं परिधान की मर्यादाएं
बेंगलूरु. आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने जिनकुशल जैन दादावाड़ी बसवनगुड़ी के आराधना भवन में आयोजित धर्मसभा में कहा कि बाह्य परिवेश का अपने विचारों पर खूब प्रभाव पड़ता है। एक सैनिक को युद्ध के मोर्चे पर लडऩे का होता है, तब वह धोती और कुर्ता पहनकर लडऩे के लिए नहीं जाता है। वह युद्धभूमि में सैनिक का ही वेष पहनता है। उसी प्रकार सामान्य जन को मर्यादित परिधान पहनने चाहिए। आचार्य ने कहा कि आज वेशभूषा की मर्यादाएं टूटती जा रही हैं।

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