राज्य के कई पुस्तकालय बंद होने के कगार पर

प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालयों को भी सरकारी शालाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संचार तकनीक के कारण सभी जानकारियां अब मोबाइल, कंप्यूटर पर आसानी से उपलब्ध हैं, इसलिए पुस्तकों से युवाओं का लगाव कम हो रहा है। सार्वजनिक पुस्तकालयों में पढऩे वालों की संख्या लगातार गिर रही है।

राज्य के कई पुस्तकालय बंद होने के कगार पर
बेंगलूरु. प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालयों को भी सरकारी शालाओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संचार तकनीक के कारण सभी जानकारियां अब मोबाइल, कंप्यूटर पर आसानी से उपलब्ध हैं, इसलिए पुस्तकों से युवाओं का लगाव कम हो रहा है। सार्वजनिक पुस्तकालयों में पढऩे वालों की संख्या लगातार गिर रही है।
शनिवार को यहां 'राष्ट्रीय पुस्तकालय सप्ताह के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी का अधिकतर समय इंटरनेट पर व्यतीत हो रहा है। नई पीढ़ी की पुस्तक पढऩे में रुचि नहीं है। राज्य में सार्वजनिक पुस्तकालयों की संख्या सात हजार से ज्यादा है। इनमें से अधिकतर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। सार्वजनिक पुस्तकालयों में संचार तकनीक का इस्तेमाल करना होगा। जिला, तहसील, ब्लॉक स्तर पर डिजिटल पुस्तकालय की स्थापना करनी होगी। इससे युवाओं को आकर्षित किया जा सकता है।
नगर निकाय बरत रहे लापरवाही
मंत्री ने कहा कि साथ में सार्वजनिक पुस्तकालयों को नगर निकायों की ओर से संग्रहित की गई 'पुस्तकालय सेसÓ की राशि जमा नहीं होने से परेशानी हो रही है। नई पुस्तकें खरीदना संभव नहीं हो रहा है। इस विभाग के लिए आवंटित राशि का 80 फीसदी उपयोग केवल कर्मचारियों के वेतन भुगतान में हो रहा है।

Sanjay Kulkarni
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