scripta house of plants in banswara rajasthan | यहां एक मकान पौधों का... वो भले नवमीं तक पढ़ पाया, उसे प्रकृति प्रेम बहुत रास आया | Patrika News

यहां एक मकान पौधों का... वो भले नवमीं तक पढ़ पाया, उसे प्रकृति प्रेम बहुत रास आया

Banswara Latest Hindi News : पर्यावरण संरक्षण का पैगाम, डेढ़ बीघा जमीन का किया उपयोग

 

बांसवाड़ा

Published: January 12, 2022 07:28:05 pm

वरुण भट्ट. बांसवाड़ा. आर्थिक अभावों एवं पारीवारिक कारणों से वो महज नवमीं तक ही पढ़ पाया, लेकिन अपने घर व खेत में पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयास उसके एेसे है कि उच्च शिक्षित भी सीख ले कर जाते है। तीन वर्ष पहले से शुरू की पौधरोपण की कवायद अब वृहद रूप लेने लगी है। पूरा मकान ही पौधों से ढक चुका है। जो अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जी हां कुछ एेसी ही कहानी जनजाति बाहुल्य बांसवाड़ा जिले के वड़लीपाड़ा भापोर के युवक कृष्णा दायमा की है। पर्यावरण प्रदूषण के बढ़ते दुष्प्रभाव को देखते हुए घर पर ही कुछ गमलों में पौधें लगाकर पर्यावरण की दिशा में काम शुरू किया।
यहां एक मकान पौधों का... वो भले नवमीं तक पढ़ पाया, उसे प्रकृति प्रेम बहुत रास आया
यहां एक मकान पौधों का... वो भले नवमीं तक पढ़ पाया, उसे प्रकृति प्रेम बहुत रास आया
डेढ़ बीघा में 30 से अधिक प्रजाति के पौधे
वड़लीपाड़ा में मुख्य मार्ग से कुछ दूरी पर भीतरी एरिये में कृष्णा का मकान व खेत है। यहां मकान पूरा पौधों के गमलों से ढका हुआ है, जो हर शख्स को विशेष रूप से आकर्षित करता है। मकान के सामने ही करीब डेढ़ बीघा खेत में तीस से अधिक प्रजातियों के सैंकड़ों सजावटी, पुष्प, फलदार के साथ ही स्वास्थ्य के लिए औषधीय विशेष रूप से लाभप्रद पौधें लगा रखे है। वे नियमित तीन घंटे पौधों की देखरेख में जुटे रहते है। उनके साथ ही उनके बच्चे भी छोटे-मोटे कार्यों में मदद में लगे रहते है। पौधों की सुरक्षा के लिए भी लौहे की जाली के साथ बागड़ कर रखी है। पानी की व्यवस्था के लिए मोटर लगाकर विशेष इंतजामात किए है।
वेस्ट को भी बना दिया बेस्ट
बकौल कृष्णा बाजार से गमले खरीदी से पूर्व प्रारंभिक दौर में वेस्ट खाली डिब्बे सहित अन्य बेकार पड़े साधनों का पौधरोपण के लिए उपयोग किया। इसके बाद इस कार्य को आगे बढ़ाया। पौधरोपण के इस कार्य को आगे बढ़ाने की मंशा जाहिर करते हुए कृष्णा ने बताया कि अब तक सरकार स्तर से किसी प्रकार की मदद नहीं मिली है। मासिक आमदनी को लेकर भी किसी प्रकार की सोच फिलहाल नहीं है, लेकिन सरकार यदि मदद करे तो काफी नवाचार करते हुए नजीर पेश करने करने का इरादा है, ताकि लोग भी इससे प्रेरित होकर इस दिशा में काम करे। शहर में भी लोगों को इस प्रयास की जानकारी मिलने के बाद पौधें लेने आते है। कई लोग तो निशुल्क भी ले गए है। मूल्य भी अधिकतम तीस रुपए तक का ही कर रखा है। पौधें देने के साथ ही यह भी कहता हूं कि अब इसकी सुरक्षा अब आपके जिम्मे है एवं अन्य लोगों को भी पौधरोपण के लिए प्रेरित करना है।

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