कथित दादागिरी खत्म करने भाजपा नेता पर चलाई थी गोलियां, तीन दिन में तीन ठिकाने बदलने के बाद पकड़ाया आरोपी

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By: deendayal sharma

Published: 30 Dec 2018, 10:37 AM IST

बांसवाड़ा. तीन दिन पूर्व भाजपा नेता पर फायरिंग कर भागे आरोपी को पुलिस ने शनिवार को परतापुर कस्बे से गिरफ्तार किया। घेराबंदी के दौरान भागने के प्रयास पर पुलिस ने करीब आधा किलोमीटर तक पीछा कर उसे धरदबोचा। अरथूना थाना प्रभारी गेहरीलाल गुर्जर ने बताया कि 26 दिसंबर को दोपहर दो बजे अरथूना निवासी पंकज पाटीदार पाटीदार एक दुकान पर दोस्तों संग बैठा था। तभी लोकिया निवासी संजय उर्फ संजू पुत्र शैलगिरी गोस्वामी ने पहुंचकर ताबड़तोड़ फायरिंग की और भाग गया। इसकी जांच के लिए पुलिस अधीक्षक कालूराम रावत के निर्देश पर टीम का गठन किया गया। अगले दिन आनंदपुरी में नवागांव रोड से आरोपी की बाइक बरामद हुई। पुलिस ने कॉल डिटेल निकाली और उसके साथियों से पूछताछ की, तो पता चला कि संजय परतापुर के हाउसिंग बोर्ड स्थित एक मकान में आता-जाता रहा है। टीम ने मकान की घेराबंदी कर आरोपी को वहीं दबोचने का प्रयास किया। भनक पर आरोपी ने खिडक़ी से भागने का प्रयास किया, लेकिन जवानों ने पीछाकर पकड़ लिया।

मंदिर, स्कूल और पंप हाउस में निकाली रात

आरोपी लगातार भागता रहा। पहली रात भैरवजी मंदिर की धर्मशाला में गुजारी, फिर पकड़े जाने के डर से बाइक नवागांव में छोडकऱ जीप से वापस भैरवजी चला आया। शाम ढलने पर बागीदौरा पहुंचकर अवकाश होने से सुरक्षित लगे सीनियर सैकण्डरी स्कूल परिसर में रात गुजारी। तीसरे दिन बागीदौरा से जीप में बैठकर बांसवाड़ा पहुंचा, जहां दिनभर घूमने-फिरने के बाद रात को कागदी पिकअप वियर के पास पुराने पंप हाउस में रात निकाली। सर्दी से बचने के लिए उसने फेरी वाले से कम्बल खरीदा और पहचान आसान नहीं हो, इसलिए हुलिया बदल लिया। मोबाइल पहले ही अनास नदी में फेंक दिया था, जिससे पकड़ा नहीं जा सके। शनिवार को वह बांसवाड़ा से जीप में बैठकर परतापुर आया, जहां से शाम को निजी बस से मुम्बई भागने की तैयारी थी। दिन में छिपने के लिए वह हाउसिंग बोर्ड की तरफ गया, जहां उसे पकड़ लिया गया।

पहले दो घंटे तक ली टोह
आरोपी ने कबूल किया कि पंकज की हत्या का इरादा था। हथियारों का जुगाड़ कर इसलिए ही वह घर से दो पिस्तौल लेकर निकला। दो घंटे तक टोह ली पर पंकज के करीब लोग होने से मौका नहीं मिला। जब दो जने ही बचे, तो बाइक चालू हालत में खड़ी करके वह गया और पहली गोली उसके सिर में नजदीक से मारी और दूसरी भी तुरंत चला दी।
वारदात की यह बताई वजह
आरोपी संजू ने वारदात की वजह पाटीदार की दादागिरी बताई। उसने खुलासा किया कि 2014 में पंकज के पेट्रोल पम्प पर नौकरी के दौरान साथी विनोद आचार्य ने चोरी का आरोप लगाकर झूठी शिकायत की। पाटीदार को सही बात बतानी चाही, जो उसने नहीं सुनी और गाली-गलौच कर निकाल दिया। दो महीने की तनख्वाह भी नहीं दी। इससे गुस्से में आकर विनोद पर तलवार से हमला किया। इस केस में वह 40 दिन जेल रहा। जमानत पर वापसी कर उसने बाकी तनख्वाह मांगी, लेकिन पाटीदार ने देने से इनकार कर बोला कि दम हो, तो ले लेना। उसने गालियां दी और चोर कहकर अपमानित किया। फिर पाटीदार ने उसके खलिहान पर दादागिरी से कब्जा कर लिया और खेतों में आने-जाने व पानी का रास्ता भी बंद कर दिया। परिजनों ने मिन्नतें की, लेकिन कब्जा नहीं हटाते हुए उसने कहा कि मेरी सरकार है, जेल में सड़ा दूंगा। फिर 2017 में अरथूना के एक युवक से बोलचाल हो गई तो पंकज के छोटे भाई सतीश पाटीदार ने युवक का पक्ष लेकर जान से मरवा देने की धमकी दी थी। इससे खुद को कुंठित महसूस किया और पंकज के परिवार से बदला लेने की ठान ली।
हथियारों की सही जानकारी नहीं होने से बची जान
पुलिस के मुताबिक संजय को हथियारों की सही जानकारी नहीं थी। उसने दोनों पिस्तौल में एक-एक गोली डाली और घर से निकला, लेकिन किस पिस्तौल में कौनसी गोली डाली, यह मालूम नहीं था। इसलिए छर्रे वाली गोली पहले चलाने से पंकज मामूली जख्मी हुआ। अपने बचाव में पंकज ने दूसरी पिस्तौल हाथ से छिनने की कोशिश की, जिससे दूसरी गोली उसके हाथ में लगी। फिर भीड़ जुटी, तो संजय भाग गया।

 

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